समर्थन मूल्य में अच्छी वृद्धि के बावजूद कुछ मोटे अनाजों की बिजाई पीछे
17-Jul-2024 03:03 PM
नई दिल्ली । हालांकि केन्द्र सरकार ने 2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन हेतु मोटे अनाजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 5 से 11.5 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोत्तरी कर दी है और प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून की अच्छी बारिश भी हुई है लेकिन इसके बावजूद कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से 7.35 लाख हेक्टेयर पीछे चल रहा है यह स्थिति तब है जब मक्का के बिजाई क्षेत्र में 15.02 लाख हेक्टेयर का शानदार इजाफा हुआ है।
दरअसल इस बार बाजरा की खेती में किसान बहुत कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं और ज्वार की खेती भी कम कर रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 की तुलना में 2024 के खरीफ सीजन के दौरान 15 जुलाई तक मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र 104.99 लाख हेक्टेयर से घटकर 97.64 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
इसके तहत ज्वार का बिजाई क्षेत्र 8.64 लाख हेक्टेयर से गिरकर 7.39 लाख हेक्टेयर तथा बाजरा का क्षेत्रफल 50.09 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 28.32 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया जिससे कुल बिजाई क्षेत्र में कमी आ गई।
दूसरी ओर रागी का रकबा 1.20 लाख हेक्टेयर उछलकर 58.86 लाख हेक्टेयर तथा स्मॉल मिलेट्स क्षेत्रफल 1.27 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 1.87 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
हालांकि बाजरा का उत्पादन क्षेत्र विगत वर्षों की तुलना में काफी हद तक सामान्य माना जा सकता है मगर वर्ष 2023 का खरीफ सीजन इसका अपवाद रहा था जब मानसून की कमजोर वर्षा एवं कुछ फसलों के बिजाई क्षेत्र में आई गिरावट के कारण किसानों का ध्यान बाजरा पर केन्द्रित हो गया और उसने इसके क्षेत्रफल को बढ़ाने का जोरदार प्रयास किया।
केन्द्र सरकार ने वहां 2023-24 की तुलना में 2024-25 के लिए हाइब्रिड ज्वार का एमएसपी 6 प्रतिशत बढ़ाकर 3371 रुपए प्रति क्विंटल,
बाजरा का समर्थन मूल्य 5 प्रतिशत बढ़ाकर 2625 रुपए प्रति क्विंटल रागी का एमएसपी 11.5 प्रतिशत बढ़ाकर 4290 रुपए प्रति क्विंटल तथा मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6.5 प्रतिशत बढ़कर 2225 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
