साप्ताहिक समीक्षा- गेहूं
22-Mar-2025 07:51 PM
मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप गेहूं का भाव कहीं नरम- कहीं तेज
नई दिल्ली। गेहूं बाजार के लिए अभी तीन महत्वपूर्ण आधार हैं। पहली बात यह है कि खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत सरकारी स्टॉक से गेहूं की नीलामी (बिक्री) बंद हो चुकी है। दूसरा आधार यह है कि कुछ राज्यों में नए गेहूं की आवक शुरू हो गई है जो आगे नियमित रूप से बढ़ती रहेगी। तीसरा आधार गेहूं के सरकारी एवं व्यापारिक उत्पादन अनुमान में 50 लाख टन से अधिक का विशाल अंतर रहना है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने इस वर्ष 1154.30 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया है जबकि रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सर्वेक्षण में 1098 लाख टन के उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई है।
सरकारी खरीद
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात एवं राजस्थान में गेहूं की सरकारी खरीद की औपचारिक प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में गेहूं पर 2025 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गई है। मध्य प्रदेश में 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा।
दिल्ली
नए माल की आपूर्ति शुरू होने से गेहूं की कीमतों पर कहीं-कहीं दबाव बढ़ने लगा है। 15-21 मार्च वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली में राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के नए गेहूं का भाव 60 रुपए घटकर 2840 रुपए प्रति क्विंटल रह रहा। लेकिन गुजरात के राजकोट में स्थानीय गेहूं का भाव 100 रुपए सुधरकर 2500/3100 रुपए तथा मध्य प्रदेश के इंदौर में 9 रुपए सुधरकर 2350/3075 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। राजकोट मंडी में गेहूं की औसत दैनिक आवक बढ़ते हुए 25-30 हजार बोरी पर पहुंच गई है जबकि इंदौर में भी 17 मार्च को 20 हजार बोरी गेहूं पहुंचा था। देवास में इसकी आवक 35 हजार बोरी तक पहुंच गई थी।
राजस्थान
राजस्थान की कोटा, बारां एवं बूंदी मंडी में अलग-अलग 15 से 30 हजार बोरी के बीच गेहूं की औसत दैनिक आवक होने की सूचना मिल रही है और इसका दाम 2400/2700 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बताया जा रहा है। केन्द्र सरकार ने राजस्थान में गेहूं की क्वालिटी से संबंधित नियमों-शर्तों में कुछ राहत देने की घोषणा की है क्योंकि वहां इसकी गुणवत्ता पर खराब मौसम का असर पड़ा है। बारां मंडी में गेहूं का भाव 170 रुपए घटकर 2400/2600 रुपए प्रति क्विंटल रह गया।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की मंडियों पर भी दबाव पड़ने लगा है। इससे केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। सरकार ने इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 310 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है जो विशाल उत्पादन को देखते हुए उचित प्रतीत होता है।
