साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल
01-Nov-2025 08:14 PM
धान की भारी अवाक जारी- चावल में कारोबार सामान्य
नई दिल्ली। खरीफ कालीन धान और बासमती की आवक प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में तेजी से बढ़ती जा रही है जबकि मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों- निर्यातकों की मांग के अनुरूप इसकी कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी-मंदी देखी जा रही है।
आवक
25 से 31 अक्टूबर वाले सप्ताह के दौरान धान की आवक दिल्ली की नरेला मंडी में रोजाना औसतन 50-55 हजार बोरी, नजफगढ़ में 15 हजार बोरी, छत्तीसगढ़ की भाटापाड़ा मंडी में 4-5 हजार बोरी, राजिम में 2-3 हजार बोरी, पंजाब के अमृतसर में 1-2 लाख बोरी, तरन तारन में 80-90 हजर बोरी, उत्तर प्रदेश के एटा में 20-25 हजार, जहांगीराबाद में 40-50 हजार, शाहजहांपुर में 1.00-1.25 लाख, अलीगढ़ में 50-60 हजार तथा खैर में 25 हजार बोरी दर्ज की गई। इसी तरह हरियाणा, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की मंडियों में भी धान की जोरदार आपूर्ति हो रही है। मांग एवं उठाव के अनुरूप धान की कीमतों में कहीं तेजी तो कहीं नरमी देखी गई।
चावल
जहां तक चावल का सवाल है तो इसमें कारोबार सामान्य देखा गया जिससे कीमतों में काफी हद तक स्थिरता बनी रही। भाटापाड़ा में श्रीराम भोग चावल का भाव 100 सुधरकर 6100/6200 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा मगर अमृतसर में 1121 सेला का दाम 350 रुपए लुढ़ककर 8300/8400 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया।
उत्तराखंड
उत्तराखंड की नगर मंडी में सीमित कारोबार के बीच लगभग सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल का भाव पूर्व स्तर पर स्थिर रहा। यही स्थिति राजिम मंडी में भी देखी गई। लेकिन राजस्थान की बूंदी मंडी में कारोबार कुछ बेहतर होने से 1509 चावल का दाम 150 रुपए बढ़कर 5550/5600 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा। हरियाणा की बेंचमार्क करनाल मंडी में चावल की कीमतों में काफी हद तक स्थिरता देखी गई।
दिल्ली
दिल्ली के नया बाजार में 1121 स्टीम एवं 1509 सेला चावल में थोड़ा-बहुत कारोबार हुआ जिससे इसका दाम 100-100 रुपए की वृद्धि के साथ क्रमश: 8000/8500 रुपए तथा 5400/5600 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा।
आपूर्ति / उपलब्धता
विदेशों में भारतीय बासमती चावल की अच्छी मांग बनी हुई है लेकिन फिलहाल घरेलू प्रभाग में धान-चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति अत्यन्त सुगम होने से कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा जा रहा है। पंजाब में भयंकर बाढ़ से बासमती धान की फसल को कुछ नुकसान हुआ है मगर मंडियों में इसकी जोरदार आपूर्ति हो रही है।
