साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल

17-Jan-2026 08:42 PM

कमजोर मांग से धान-चावल के दाम में नरमी 

नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की मांग कमजोर रहने से भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पाद का दाम नीचे रखने के लिए विवश होना पड़ रहा है। गैर बासमती श्रेणी के सफेद एवं सेला चावल के वैश्विक निर्यात बाजार में भारत सहित अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। इसी तरह अमरीका में 50 प्रतिशत का ऊंचा टैरिफ लागू रहने तथा ईरान में भुगतान का संकट उत्पन्न होने से बासमती चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। इसके फलस्वरूप घरेलू मंडियों में धान की खरीद में मिलर्स-प्रोसेसर्स एवं निर्यातकों की सक्रियता घट गई है। 
दिल्ली 
10-16 जनवरी वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला मंडी में 10-20 हजार बोरी धान की रोजाना आवक के बीच कम कारोबार के कारण 1509 कम्बाइन का भाव 70 रुपए गिरकर 3400 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया। नजफगढ़ मंडी में 1000-3000 बोरी के बीच धान की दैनिक आवक हुई। 
छत्तीसगढ़ 
छत्तीसगढ़ की भाटपाड़ा एवं राजिम मंडी में धान की संयुक्त आवक 4500-5000 बोरी के बीच दर्ज की गई। राजिम में भाव कुछ तेज रहा। वहां मुख्यतः ए ग्रेड धान की आपूर्ति होती है। 
पंजाब / उत्तर प्रदेश 
पंजाब तथा हरियाणा की मंडियों में धान की आवक नहीं या नगण्य हो रही है इसलिए कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। लेकिन उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण मंडियों- एटा, मैनपुरी, जहांगीराबाद, खैर, अलीगढ एवं शाहजहांपुर में बासमती धान की सामान्य आवक देखी गई जबकि कम उठाव के कारण कीमतों में नरमी का माहौल बना रहा। 
चावल 
जहां तक चावल का सवाल है तो समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान इसकी कीमतों में या तो स्थिरता या सामान्य उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। अमृतसर में 1509 सेला तथा 1718 स्टीम चावल का दाम 150 रुपए की बढ़त के साथ क्रमश: 6550/6600 रुपए प्रति क्विंटल तथा 7350/7400 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा मगर  1509 स्टीम का दाम 100 रुपए गिरकर 7200/7300 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। 
राजस्थान 
राजस्थान की बूंदी मंडी में मजबूत मांग के कारण चावल की कीमतों में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी रही। इसी तरह हरियाणा की बेंचमार्क करनाल मंडी में चावल का भाव कमजोर देखा गया। समझा जाता है कि शीघ्र ही पश्चिम एशिया, मध्य-पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में बासमती चावल के रमजान की अच्छी मांग निकलने की संभावना है जबकि अफ्रीकी देश की सामान्य श्रेणी के गैर बासमती चावल की खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा सकते हैं।