सरकार के समक्ष किसानों को लाभप्रद मूल्य सुनिश्चित करने की चुनौती
23-Oct-2025 03:39 PM
नई दिल्ली। कुछ माह पूर्व तक सरकार को बढ़ती खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी थी मगर अब स्थिति बदल गई है।
विशाल आयात घरेलू उत्पादन तथा सामान्य से कम मांग के चलते विभिन्न कृषि एवं खाद्य उत्पादों के थोक मंडी भाव में आई गिरावट के कारण किसानों की चिंता एवं परेशानी काफी बढ़ गई है।
सोयाबीन, कपास, दलहन, तिलहन और यहां तक कि मक्का की बिक्री भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर हो रही है।
सितम्बर 2025 में लगातार चार महीनों से खुदरा खाद्य महंगाई की वृद्धि दर ऋणात्मक जोन में चल रही है। जबकि जुलाई 2023 से दिसम्बर 2024 के 18 महीनों के दौरान उपभोक्ता की हालत सुगम होते ही कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा।
मानसून की अच्छी वर्षा होने से घरेलू कृषि उत्पादन की स्थिति बेहतर रही जबकि विदेशों से कुछ उत्पादों के आयात को प्रोत्साहित भी किया गया। इसमें दलहनों और खाद्य तेल विशेष रूप से शामिल हैं।
इसकी आवक बढ़ने लगी है। दीपावली के बाद अक्सर ऐसा होता है धान और गन्ना के उत्पादकों को तो विशेष चिंता नहीं रहती है क्योंकि इसके खरीदार निश्चित होते हैं लेकिन सोयाबीन, मूंगफली, उड़द एवं मूंग के साथ-साथ कपास के उत्पादकों को कमजोर बाजार भाव से भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार को इसकी खरीद करनी होगी तभी किसानों को एमएसपी का फायदा मिल सकेगा। इस बार उत्पादन में मिश्रित रुख रहने की संभावना है लेकिन कीमतों में गिरावट का माहौल सम्पूर्ण जिंस बाजार में देखा जा रहा है।
