सरसों के बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद
06-Nov-2025 12:45 PM
नई दिल्ली। रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सरसों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के लिए तमाम परिस्तिथियां अनुकूल बनी हुई हैं।
एक तो सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2024-25 सीजन के 5950 रुपए प्रति क्विंटल से 4.3 प्रतिशत बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए 6200 रुपए प्रति क्विंटल नियत कर दिया है और दूसरे, चीन ने भारी मात्रा में भारत से रेपसीड मील (खल सरसों) खरीदना आरंभ कर दिया है।
सरसों तेल का दाम भी काफी ऊंचे स्तर पर है जिससे सरसों का थोक मंडी भाव पिछले अनेक महीनों से किसानों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
तेल मिलर्स को किसानों से ऊंचे मूल्य स्तर पर सरसों खरीदने में कोई कठिनाई नहीं हो रही है। वास्तविकता तो यही है कि मई 2025 से ही सरसों के दाम में एमएसपी से ऊंचे स्तर पर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा एवं गुजरात जैसे शीर्ष सरसों उत्पादक प्रांतों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की जोरदार वर्षा होने से खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद है और इसलिए किसानों को इसकी निर्बाध बिजाई में कोई दिक्कत नहीं हो रही है।
आकर्षक आमदनी प्राप्त होने से किसान काफी उत्साहित हैं और सरसों की खेती में भारी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके फलस्वरूप इस महत्वपूर्ण तिलहन के क्षेत्रफल में शानदार बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।
पिछले साल इसका रकबा कुछ घट गया था लेकिन फिर भी पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 79 लाख हेक्टेयर से काफी ऊंचा रहा था। चालू रबी सीजन के दौरान सरसों का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर यदि 100 लाख हेक्टेयर तक या उससे भी ऊपर पहुंच जाये तो कोई हैरानी की बात नहीं है।
यूं तो किसी भी फसल का उत्पादन काफी हद तक मौसम पर निर्भर रहता है लेकिन इस बार सरसों के बारे में इतना निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि किसान अपनी फसल की बेहतरीन देख भाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
सरसों का उत्पादन बढ़ाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। जाड़े का मौसम आरंभ हो चुका है और तापमान में गिरावट आने लगी है जो सरसों की फसल के लिए लाभदायक है।
