सरसों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से 3.50 लाख हेक्टेयर आगे

19-Dec-2025 01:07 PM

नई दिल्ली। रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सरसों की खेती में इस बार भारतीय किसान, अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं क्योंकि पिछले सात-आठ महीनों से इसका थोक मंडी भाव सरकार समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्तमान रबी सीजन के दौरान 12 दिसम्बर 2025 तक सरसों का कुल घरेलू उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 84.67 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया

जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 81.16 लाख हेक्टेयर से 3.51 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। इस वर्ष सरसों का पंचवर्षीय (सामान्य) औसत क्षेत्रफल करीब 79 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि वास्तविक रकबा उससे आगे निकल चुका है। 

देश के सभी प्रमुख उत्पादक प्रांतों- राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, बंगाल एवं गुजरात आदि में सरसों की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है जिससे इसके क्षेत्रफल में वृद्धि हो रही है। फसल की हालत लगभग सभी क्षेत्रों में सामान्य या संतोषजनक बनी हुई है।

मौसम की स्थिति अनुकूल है और खेतों की मिटटी में नमी का अच्छा अंश मौजूद है। वैसे कहीं-कहीं अक्टूबर-नवम्बर के दौरान असमान वर्षा होने से फसल पर असर पड़ने की आशंका है। कुल मिलाकर फसल को संतोषजनक माना जा रहा है और आगामी परिदृश्य भी बेहतर नजर आ रहा है।  

उल्लेखनीय है कि सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के मस्टर्ड मॉडल्स फार्म्स प्रोग्राम के अंतर्गत क्रियान्वयन साझीदार- सोलिडरीडाड द्वारा चालू रबी सीजन के दौरान राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं हरियाणा में करीब 3000 मॉडल फार्म संचालित किया जा रहा है

जिसका उद्देश्य नवीनतम तकनीक और अत्याधुनिक कृषि पद्धति की सहायता से सरसों का उत्पादन तेजी से बढ़ाना है। सरसों की नई फसल की छिटपुट आवक फरवरी से आरंभ होगी जबकि मार्च से मई के दौरान सभी उत्पादक राज्यों की मंडियों में इसकी जोरदार आपूर्ति जारी रहेगी।