सितम्बर-अक्टूबर में शुष्क मौसम से कश्मीर में केसर की फसल बुरी तरह प्रभावित

13-Nov-2024 04:10 PM

श्रीनगर । पिछले दो महीनों के दौरान जम्मू कश्मीर के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मौसम गर्म एवं शुष्क रहने तथा वर्षा का अभाव होने से केसर की फसल को भारी नुकसान हुआ और इसका उत्पादन गत वर्ष के मुकाबले 40-50 प्रतिशत तक घट जाने की आशंका है।

उत्पादन लागत में भारी वृद्धि होने तथा उत्पादन में जोरदार गिरावट आने से केसर का भाव काफी ऊंचे स्तर पर रहने की उम्मीद है जबकि इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल बनी रहेगी।

बेहतर उत्पादन के लिए कश्मीर सितम्बर-अक्टूबर के दौरान अच्छी बारिश की जरूरत थी मगर सामान्य औसत से काफी कम वर्षा होने के कारण फसल क्षतिग्रस्त हो गई और इसकी उपज दर में भारी गिरावट आने की आशंका पैदा हो गई। 

फसल की अत्यन्त कमजोर हालत को देखते हुए अनेक उत्पादक इतने दुखी और चिंतित हैं कि वे अगले कुछ वर्षों तक इसकी खेतों छोड़ने का प्लान बनने लगे हैं। कुछ उत्पादक  दूसरे रोजगार की तरफ मुड़ने की सोच रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि दुनिया के इस सबसे महंगे मसाले (केसर) की फसल पर ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।

भारत में उत्पादित केसर की क्वालिटी ईरान तथा स्पेन के माल से बहुत अच्छी होती है लेकिन विपणन की उचित व्यवस्था नहीं होने तथा सरकारी सहयोग-समर्थन का अभाव रहने से केसर की खेती से उत्पादकों का मोह भांग होने लगा है।

सरकार को केसर उत्पादकों को अल्पकालीन क्षतिपूर्ति देने पर विचार करना चाहिए ताकि किसान अगले वर्ष पूरे उत्साह के साथ इसकी खेती से जुड़े रहें और इसका उत्पादन बढ़ाने का हर संभव प्रयास कर सके।

केसर अनेक कश्मीरी लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। घरेलू उत्पादन घटने से आगामी महीनों में विदेशों से केसर का आयात बढ़ सकता है।