सोया तेल एवं डीडीजीएस के साथ दलहन भी ट्रेड डील में शामिल

10-Feb-2026 06:03 PM

नई दिल्ली। भारत और अमरीका के बीच हुए द्विपक्षीय व्यापारिक करार (ट्रेड डील) के फ्रेम वर्क की नई-नई परतें उभरकर सामने आ रही हैं। डीडीजीएस तथा सोयाबीन तेल के बाद अब दलहनों के भी इस ट्रेड डील में शामिल होने की सूचना मिल रही है।

उल्लेखनीय है कि पहले जो अंतरिम फ्रेम वर्क के लिए संयुक्त बयान जारी किया गया था उसमें शामिल वस्तुओं में दलहनों का कोई जिक्र नहीं था लेकिन गत रात जो 'तथ्य पत्र' (फैक्ट शीट) घोषित हुआ उसमें दलहनों की चर्चा भी सम्मिलित है।

वैसे इस फैक्ट शीट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अमरीका से किस दलहन के आयात को सीमा शुल्क में विशेष छूट दी जाएगी लेकिन समझा जाता है कि ये दलहन मसूर पीली मटर हो सकती हैं जिसके शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने की संभावना है। 

उल्लेखनीय है कि अमरीका में मुख्यतः सूखी हरी मसूर का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है जिसका दाम लाल मसूर से काफी ऊंचा रहता है। भारत में अधिकांशतः लाल मसूर का ही आयात किया जाता है। लेकिन अब अमरीका से हरी मसूर का भारी आयात शुरू हो सकता है।

अमरीका से दलहनों का कुल मिलाकर जितना वार्षिक निर्यात होता है उसके 8 से 12 प्रतिशत तक का आयात भारत करता है। भारत में पीली मटर पर 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क सभी देशों के लिए लागू है। यदि अमरीका को इससे छूट मिली तो स्वभाविक रूप से उसका निर्यात भारत में बढ़ जाएगा। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान अमरीका से भारत को 740-760 लाख डॉलर मूल्य के दलहनों का निर्यात हुआ और इस तरह मैक्सिको कनाडा तथा यूरोपीय संघ के बाद भारत अमरीकी दलहनों का चौथा सबसे बड़ा बाजार बन गया।

कुछ सप्ताह पूर्व अमरीका के दो सांसद भारत के दौरे पर आये थे और और यहां उसने ट्रेड डील में दलहनों को शामिल करने के लिए जोरदार लॉबिंग की थी। इसके साथ-साथ उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति को भी पत्र भेजकर व्यापार समझौता में दलहनों को सम्मिलित करने का आग्रह किया था।

ऐसा लगता है कि अमरीका ने अंतिम समय में इसके लिए भारत पर दबाव बनाया। अमरीका में दलहनों का उत्पादन मुख्यतः उत्तरी डकोटा, मोंटाना, वाशिंगटन तथा इडाहो जैसे प्रांतों में होता है। अब उसके उत्पादकों को भारत के रूप में एक विशाल एवं स्थायी बाजार मिल जाएगा।