तिलहन फसलों के उत्पादन संवर्धन हेतु बजट में कोई प्रस्ताव नहीं
02-Feb-2026 05:19 PM
मुंबई। संसद में 1 फरवरी 2026 को जो केंद्रीय आम बजट पेश किया गया था उससे तेल-तिलहन उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र को काफी निराशा हुई। एक अग्रणी उद्योग संस्था- साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (SEA) का कहना है कि सरकार ने आत्मनिर्भरता के लिए तिलहनों का उत्पादन बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर गंवा दिया। एसोसिएशन ने अपने बजट पूर्व ज्ञापन में तिलहन-तेल क्षेत्र के त्वरित विकास-विस्तार के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
एसोसिएशन के अनुसार पिछले तीन दशकों के दौरान भारतीय तिलहन-तेल क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव आया है और खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता बढ़कर अब 60 प्रतिशत के आसपास पहुंच गयी है। इसका प्रमुख कारण यह है कि देश के अन्दर खाद्य तेलों की मांग एवं खपत तो तेजी से बढ़ती जा रही है लेकिन इसके अनुरूप तिलहनों की पैदावार में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। 2025-26 के दौरान खाद्य तेलों की घरेलू खपत बढ़कर 260-265 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान है जबकि स्वदेशी स्रोतों से इसकी कुल उपलब्धता 110-115 लाख टन पर ही अटकने की सम्भावना है।
वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट तिलहन-तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दृष्टी से एक महत्वपूर्ण अवसर एवं बेहतर माध्यम साबित हो सकता था। एसोसिएशन नियमित रूप से खाद्य तेलों का आयात घटाने एवं घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव देता रहा है लेकिन बजट में उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क्ष का मौजूदा स्तर उपभोक्ताओं एवं तिलहन उत्पादकों के लिए सुविधाजनक है इसलिए वित्त मंत्री को बजट में इसमें बदलाव करने की जरुरत नहीं समझी।
