तिलहन की पैदावार बढ़ाना आवश्यक
26-Jul-2025 12:00 PM
भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश इसलिए बना हुआ है क्योंकि स्वदेशी उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता है।
सैद्धांतिक रूप से भारत अमरीका, ब्राजील, अर्जेन्टीना एवं चीन के बाद संसार में तिलहन तेल का पांचवां सबसे प्रमुख उत्पादक देश है लेकिन व्यावहारिक तौर पर वहां खाद्य तेलों का उत्पादन घरेलू मांग एवं खपत की तुलना में इतना कम होता है कि देश को विदेशों से प्रति वर्ष 150-160 लाख टन का आयात करने के लिए विवश होना पड़ता है जिस पर अरबों रुपए मूल्य की विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
खाद्य तेलों का आयात मुख्यतः इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेन्टीना, ब्राजील, रूस एवं यूक्रेन जैसे देशों से किया जाता है। खाद्य तेलों की घरेलू मांग एवं खपत वर्ष-प्रतिवर्ष तेजी से बढ़ती जा रही है क्योंकि एक तो देश की जनसंख्या एवं प्रति व्यक्ति आय में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है
और दूसरे बढ़ते शहरीकरण के कारण लोगों खाद्य शैली में भी बदलाव कम रहा है। विदेशों से खाद्य तेलों के आयात पर तेजी से बढ़ती निर्भरता के कारण न केवल भारतीय बाजार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है
बल्कि भारतीय किसानों को तिलहनों का लाभप्रद मूल्य प्राप्त करने के लिए भी कठिन संघर्ष करना पड़ता है। अक्सर भारत की मजबूरी का फायदा उठाकर निर्यातक देश अपने खाद्य तेल के दाम में मनमानी वृद्धि कर देते हैं जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।
वर्तमान समय में जहां एक तरफ अधिकांश खाद्य उत्पादों की कीमतों में गिरावट अथवा स्थिरता का माहौल बना हुआ है वहीं दूसरी ओर खाद्य तेल के दाम में भारी तेजी-मजबूती देखी जा रही है।
पिछले एक साल के अंदर खाद्य तेलों के मूल्य में 20 से 30 प्रतिशत तक का जोरदार इजाफा हो चुका है और अब भी इसमें नरमी की संभावना नजर नहीं आ रही है।
सरकार ने पहले खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाया और बाद में क्रूड श्रेणी के तेलों पर सीमा शुल्क में कटौती कर दी। वैश्विक बाजार में भाव आगे भी ऊंचा रहने की उम्मीद है क्योंकि इंडोनेशिया में बायोफ्यूल के निर्माण में 40 प्रतिशत पाम तेल के उपयोग का अनिवार्य निमम लागू हो चुका है और अमरीका की नीति भी कीमतों को ऊंचा उठाने में सहायक बनेगी।
भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने का जोरदार प्रयास होना चाहिए और इसके लिए तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना एक मात्र उपाय है। उत्पादन बढ़ाने के लिए तिलहनों की औसत उपज दर में भारी इजाफा होना आवश्यक है।
