त्यौहारी सीजन के बाद मांग घटने से चावल के दाम में जोरदार गिरावट
04-Nov-2025 06:12 PM
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्तर पर दीपावली पर्व के बाद ही त्यौहारी सीजन का समापन हो गया और इसलिए चावल की मांग कमजोर पड़ने लगी।
दूसरी ओर खरीफ कालीन धान की नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ होने से बाजार में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ गई। इसके परिणामस्वरूप चावल के दाम पर दबाव बढ़ने लगा और सामान्य श्रेणी के गैर बासमती चावल के मूल्य में 6 प्रतिशत तथा गोविंदभोग जैसे विशिष्ट किस्म के चावल के भाव में 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई।
इस वर्ष खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र उछलकर 441 लाख हेक्टेयर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और दक्षिण-पश्चिम मानसून की जोरदार बारिश होने से फसल की हालत अच्छी रही। इससे धान की पैदावार बढ़ने के आसार हैं।
बासमती चावल के दाम में भी नरमी आई है क्योंकि एक तो ऊंचे सीमा शुल्क के कारण अमरीका में इसका निर्यात प्रभावित हो रहा है और दूसरे, इस कमी को पूरा करने के लिए भारतीय निर्यातक जापान तथा इंडोनेशिया जैसे नए बाजारों में शिपमेंट बढ़ाने के लिए खरीदारों को आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक के अनुसार स्वर्णा जैसे सामान्य श्रेणी के गैर बासमती चावल का भाव 36 रुपए प्रति किलो से गिरकर 33 रुपए प्रति किलो पर आ गया है।
त्यौहारी सीजन के दौरान मिनी केट चावल की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ था मगर अब इसमें स्थिरता आ गई है। अगले तीन से चार महीनों तक चावल के दाम में ज्यादा तेजी आने की संभावना नहीं है। बाजार (मंडियों) में धान की भरपूर आपूर्ति हो रही है और मिलर्स प्रोसेसर्स मोल भाव के साथ इसकी खरीद भी कर रहे हैं।
गोविंदभोज जैसी विशिष्ट किस्म के चावल की कीमतों में जोरदार गिरावट देखी जा रही है। एक पखवाड़ा पूर्व इसका दाम उछलकर 220 रुपए प्रति किलो के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया था जो वर्तमान समय में करीब 36 प्रतिशत लुढ़ककर 140 रुपए प्रति किलो पर आ गया है। जल्दी ही इसके और घटकर 100 रुपए प्रति किलो पर आने की संभावना है।
1509 बासमती चावल का मूल्य भी 85 रुपए प्रति किलो से गिरकर 80 रुपए प्रति किलो रह गया है। इससे लग्नसरा के सीजन में भारतीय उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की संभावना है। वैसे जल्दी ही इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
