दक्षिण भारत में होने वाली बारिश दलहन-तिलहन फसलों के लिए हानिकारक
22-Oct-2024 06:09 PM
तिरुअनन्तपुरम । बंगाल की खाड़ी के ऊपर निर्मित कम दाब का क्षेत्र सघन होने के बाद आगे बढ़ने लगा जिससे दक्षिण भारत के विभिन्न भागों में भारी वर्षा का दौर शुरू हो गया।
इस वर्षा का दायरा सुदूर केरल एवं तमिलनाडु से लेकर कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं उड़ीसा तक फैला हुआ है। महाराष्ट्र और गोवा के कई क्षेत्रों में भी बारिश हुई। इन इलाकों में अभी उत्तर पूर्व मानसून सक्रिय हैं और यह दिसम्बर के अंत तक सक्रिय रह सकता है।
अक्टूबर की बारिश आमतौर पर खरीफ फसलों के लिए लाभदायक नहीं मानी जाती है क्योंकि यह अगैती बिजाई वाली फसलों की कटाई-तैयारी का समय होता है और इस वर्षा से फसल की औसत उपज दर के साथ क्वालिटी भी प्रभावित होने का खतरा रहता है।
वैसे इस बारिश से पिछैती बिजाई वाली फसल को थोड़ा-बहुत फायदा खासकर उन क्षेत्रों में हो सकता है जहां सितम्बर में वर्षा का अभाव रहा।
लेकिन पिछले कुछ दिनों के दौरान जिन इलाकों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश हुई वहां खेतों में पानी भर गया जिससे न केवल खरीफ फसलों और खासकर दलहन-तिलहन की कटाई-तैयारी में बाधा पड़ रही है बल्कि रबी फसलों की बिजाई में देरी होने की आशंका भी है।
कर्नाटक तुवर का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है। वहां इसकी फसल तेजी से प्रगति कर रही है और दिसम्बर में पक कर कटाई के लिए तैयार हो जाएगी।
इस फसल को अब जोरदार वर्षा की नहीं बल्कि नियमित अंतराल पर हल्की बारिश एवं धूप की आवश्यकता है। भारी वर्षा से दक्षिण भारत में मूंग, उड़द, सोयाबीन, मूंगफली तथा कपास आदि की फसल को नुकसान होने की आशंका है। इससे किसानों को घाटा होगा।
