दाल-दलहन की कीमतों में ज्यादा तेजी आने की संभावना नहीं

29-May-2025 01:12 PM

मुम्बई। उद्योग- व्यापार क्षेत्र के संघों - संगठनों एवं विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम होने से दाल-दलहन की कीमतों में अगले कुछ महीनों तक जोरदार बढ़ोत्तरी होना मुश्किल लगता है लेकिन सामान्य तेजी-मंदी बरकरार रह सकती है।

विदेशों से सस्ते दलहनों का आयात जारी है और रबी कालीन दलहनों की अच्छी आवक हो रही है। इसके अलावा खरीफ सीजन के दौरान दलहनों के बेहतर उत्पादन के आसार हैं क्योंकि एक तो मानसून की वर्षा सामान्य औसत से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है और दूसरे, सरकार ने इसके समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी भी कर दी है। 

पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान तुवर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7550 रुपए प्रति क्विंटल से 450 रुपए बढ़ाकर 8000 रुपए प्रति क्विंटल तथा उड़द का समर्थन मूल्य 7400 रुपए से 400 रुपए बढ़ाकर 7800 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

सरकार का कहना है कि वह इन दोनों दलहनों के शत-प्रतिशत अधिशेष स्टॉक की खरीद करने को प्रतिबद्ध है। 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में सरकारी एजेंसी द्वारा करीब 5.62 लाख टन तुवर की खरीद की गई है। 

खरीफ कालीन दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद की जा रही है। तुवर के दोनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में मानसून की जोरदार बारिश हो रही है।

जबकि उड़द के प्रमुख उत्पादक राज्य- मध्य प्रदेश में भी मानसून सक्रिय हो चुका है। इसके अलावा गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी बारिश हो रही है। दलहन फसलों की बिजाई के लिए मजबूत आधार तैयार हो रहा है जिससे किसानों को क्षेत्रफल बढ़ाने में कठिनाई नहीं होगी। 

तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को पहले ही 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया जा चुका है और चना तथा मसूर पर भी केवल 10-10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया गया है। इससे देश में इन चारों दलहनों के आयात का प्रवाह जारी रहेगा। पीली मटर पर फैसला होना अभी बाकी है।