दलहनों का आयात 40 प्रतिशत घटकर 45 लाख टन पर सिमटने का अनुमान

07-Oct-2025 04:06 PM

मुम्बई। वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत में दलहनों का कुल आयात तेजी से उछलकर 73.40 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था लेकिन 2025-26 के मौजूदा वित्त वर्ष में यह करीब 39.40 प्रतिशत घटकर 45 लाख टन के आसपास अटक जाने की संभावना है।

देश में दलहनों का भरपूर पिछला बकाया स्टॉक मौजूद है और खरीफ तथा रबी सीजन में इसका उत्पादन भी संतोषजनक होने के आसार हैं खरीफ कालीन दलहनों की आवक शुरू हो गई है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के शुरूआती 5 महीनों में यानी अप्रैल-अगस्त 2025 के दौरान देश में दलहनों का आयात घटकर 12.10 लाख टन पर अटक गया जो वर्ष 2024 के इन्हीं महीनों के आयात 22.70 लाख टन से 47 प्रतिशत कम रहा।

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के सचिव के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की सम्पूर्ण अवधि के दौरान भारत में 50 लाख टन से कम दलहनों का आयात होने का अनुमान है।

पिछले साल देश में करीब 25 लाख टन पीली मटर तथा लगभग 15 लाख टन देसी चना का आयात किया गया था लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान इसके आयात में जोरदार गिरावट आने की संभावना है। 

वर्तमान समय में लगभग 9 लाख टन दलहनों का स्टॉक देश के विभिन्न बंदरगाहों पर तथा लगभग 20 लाख टन का स्टॉक सरकारी गोदामों में मौजूद है जो आगामी महीनों के दौरान घरेलू प्रभाग में आपूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है जबकि दिसम्बर-जनवरी में तुवर की फसल भी आने लगेगी। 

इस बार रबी सीजन में चना, मसूर एवं मटर सहित अन्य दलहनों की अच्छी बिजाई एवं बेहतर पैदावार होने की उम्मीद है। खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद है।

चना तथा मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी अच्छी  बढ़ोत्तरी की गई है। यदि दीपावली के बाद पीली मटर के आयात पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया तो दलहनों के कुल आयात में ओर भी कमी आ सकती है। कृषि मंत्रालय, नीति आयोग एवं सीएसीपी मटर आयात को रोके जाने के पक्ष में है। 

समझा जाता है कि उद्योग- व्यापार क्षेत्र तथा उत्पादकों के पास भी करीब 20 लाख टन दलहनों का स्टॉक उपलब्ध है। खरीफ सीजन में उत्पादन कुछ घटने की संभावना है लेकिन रबी सीजन के बेहतर संभावित उत्पादन से इसकी भरपाई आसानी से हो सकती है।