दलहनों की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद करने की जरूरत पर जोर
24-Oct-2025 06:01 PM
नई दिल्ली। हालांकि केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 11,440 करोड़ रुपए की धनराशि के साथ दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की लांचिंग की स्वीकृति प्रदान कर दी है जिसके तहत दलहन फसलों की कुल बिजाई, उपज दर एवं पैदावार में बढ़ोत्तरी का गंभीर प्रयास किया जाएगा लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि जब तक किसानों को अपने उत्पादों का आकर्षक एवं लाभप्रद मूल्य नहीं मिलेगा तब तक दलहनों के उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोत्तरी संभव नहीं हो पाएगी।
खरीफ कालीन दलहन फसलों और खासकर उड़द एवं मूंग के नए माल की आवक पहले ही आरंभ हो चुकी है जबकि इसका थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चल रहा है। तुवर का दाम भी नीचे ही है।
सरकार प्रत्येक वर्ष दलहनों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तो बढ़ाती है मगर किसानों से इस मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खरीद नहीं करती है।
ध्यान देने वाली बात है कि सरकार ने एमएसपी पर तुवर, उड़द एवं मसूर की शत-प्रतिशत खरीद करने की घोषणा कर रखी है लेकिन इसमें तमाम जटिलताएं मौजूद रहती हैं।
अब रबी कालीन दलहन फसलों की बिजाई का सीजन आरंभ हो चुका है जिसमें मुख्यतः चना एवं मसूर शामिल हैं। मटर की खेती भी इस सीजन में होती है मगर उसके लिए न तो एमएसपी का निर्धारण होता है और न ही उसकी सरकारी खरीद होती है।
सरकार एमएसपी पर पांच दलहनों- तुवर, उड़द, मूंग, देसी चना एवं मसूर की खरीद करती है। विश्लेषकों के अनुसार रबी सीजन में दलहनों की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी तभी बढ़ेगी जब सरकार चना तथा मसूर की 100 प्रतिशत खरीद की गारंटी प्रदान करे और इसकी खरीद में देरी न हो क्योंकि जब तक सरकारी खरीद आरंभ होती है तब तक अधिकांश छोटे किसान अपना दलहन बेच चुके होते हैं।
