दलहन-तिलहन की बिजाई घटाकर गेहूं का क्षेत्रफल बढ़ाने का प्रयास
25-Dec-2024 01:12 PM
मुम्बई । भारतीय किसानों की बिजाई रणनीति में इस बार महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। वे दलहन-तिलहन की कीमत पर गेहूं का रकबा बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। दरअसल वे स्थिर फायदे की तरफ देख रहे हैं।
सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की विशाल मात्रा निश्चित रूप से खरीदी जाती है क्योंकि आगे उसका वितरण करना होता है।
खरीफ कालीन तिलहन फसलों का भाव घटकर एमएसपी से नीचे आ गया है जबकि विदेशों से दलहनों का भारी आयात होने से इसकी कीमतों पर भी दबाव बढ़ने लगा है।
पिछले साल के मुकाबले चालू रबी सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर दलहन-तिलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है मगर गेहूं का रकबा बढ़ गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष रबी फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 635.60 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि 20 दिसम्बर तक उसके 93 प्रतिशत भाग में बिजाई हो चुकी थी।
पिछले सप्ताह 32 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बिजाई हुई। रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 20 दिसम्बर को 590.82 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 590.97 लाख हेक्टेयर से कुछ ही नीचे है।
रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल-सरसों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 93.73 लाख हेक्टेयर से 5.6 प्रतिशत घटकर इस बार 88.50 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि मूंगफली का क्षेत्रफल 3.12 लाख हेक्टेयर से 7.4 प्रतिशत घटकर 2.89 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
सैफ्लावर का रकबा पहले आगे चल रहा था मगर अब वह भी 64 हजार हेक्टेयर से गिरकर 61 हजार हेक्टेयर रह गया है।
रबी तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 95.22 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंचा है जो गत वर्ष के क्षेत्रफल 100.89 लाख हेक्टेयर से 5.6 प्रतिशत कम है। 14-20 दिसम्बर वाले सप्ताह के दौरान करीब 3 लाख हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई।
