दलहन उत्पादों में भारी बढ़ोत्तरी की संभावना नहीं

21-Jan-2026 01:23 PM

नई दिल्ली। हालांकि रबी कालीन दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 133.18 लाख हेक्टेयर से 2.9 प्रतिशत बढ़कर इस बार 137 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है और कुल मिलाकर मौसम की हालत भी सामान्य बनी हुई है लेकिन फिर भी इसका कुल उत्पादन 165.70 लाख टन के सरकारी लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल लगता है। चना के बिजाई क्षेत्र में अच्छी, मसूर के रकबे में सामान्य, मूंग के क्षेत्रफल में मामूली इजाफा हुआ है जबकि उड़द की बिजाई कम हुई है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालु रबी सीजन के दौरान चना का उत्पादन क्षेत्र 91.22 लाख हेक्टेयर से 5.1 प्रतिशत उछलकर 95.88 लाख हेक्टेयर, मसूर का बिजाई क्षेत्र 17.66 लाख हेक्टेयर से 2.6 प्रतिशत बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर तथा मूंग का क्षेत्रफल 81 हजार हेक्टेयर से 4.9 प्रतिशत सुधरकर 85 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया जबकि उड़द का रकबा 4.88 लाख हेक्टेयर से 6.1 प्रतिशत घटकर 4.58 लाख हेक्टेयर रह गया। इसके आलावा रबी सीजन में कुल्थी एवं खेसारी सहित कुछ अन्य दलहनों की खेती भी होती है। 

हालांकि उत्तरी एवं मध्यवर्ती भारत के अधिकांश इलाको में लम्बे समय से अच्छी बारिश नहीं हुई है लेकिन तापमान नीचे रहने और मौसम ठंडा होने से फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने 22-24 जनवरी के दौरान पश्चिमोत्तर भारत में बारिश होने की संभावना व्यक्त की है जिससे खासकर राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं अन्य निकटवर्ती प्रांतो में फसल को राहत मिलने की उम्मीद है। 

चना रबी सीजन का सबसे प्रमुख दलहन है और देश के कुल वार्षिक दलहन उत्पादन में इसका योगदान 40 प्रतिशत के आस-पास रहता है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं गुजरात इसके शीर्ष उत्पादक राज्य है इस महत्वपूर्ण दलहन फसल की बिजाई पूरी हो चुकी है और अगैती बिजाई वाली फसल की कटाई-तैयारी अगले महीने से आरम्भ होने की संभावना है। मसूर का अधिकांश उत्पादन मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती बुंदेलखंड संभाग में होता है। वहां मटर की खेती भी खड़े पैमाने पर होती है। बिहार तथा बंगाल में भी मसूर का अच्छा उत्पादन होता है।