दिसम्बर में ऑयल मील के निर्यात में 40 प्रतिशत की भारी गिरावट

19-Jan-2026 08:53 PM

मुम्बई। सोया डीओसी के कमजोर प्रदर्शन के कारण दिसम्बर 2025 में भारत से ऑयल मील के निर्यात में काफी कमी आ गई। नवम्बर में भी सोयामील का निर्यात काफी घट गया था। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों के दौरान ऑयल मील के कुल निर्यात में 5.5 प्रतिशत एवं दिसम्बर में 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 

वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की एक अग्रणी संस्था- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है

कि अप्रैल दिसम्बर 2025 के नौ महीनों में भारत से कुल 29.75 लाख टन ऑयल मील का निर्यात हुआ जो अप्रैल-दिसम्बर 2024 के शिपमेंट 31.50 लाख टन से 5.50 प्रतिशत कम रहा। इसी तरह दिसम्बर 2024 में देश से 3.98 लाख टन ऑयल मील का निर्यात हुआ था जो दिसम्बर 2025 में 40 प्रतिशत लुढ़ककर 2.40 लाख टन पर अटक गया। 

एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार नवम्बर-सितम्बर 2024 के दो महीनों में देश से 4.61 लाख टन सोयामील का निर्यात हुआ था जो वर्ष 2025 के इन्हीं महीनों में 50 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 2.28 लाख टन पर सिमट गया।

इसका निर्यात नवम्बर 2024 के 1.83 लाख टन से गिरकर नवम्बर 2025 में 1.13 लाख टन तथा दिसम्बर 2024 के 2.78 लाख टन से घटकर दिसम्बर 2025 में 1.14 लाख टन रह गया। वैश्विक बाजार में भारतीय सोयामील का निर्यात ऑफर मूल्य अन्य आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी नहीं रहा।

वैसे यूरोप में भारतीय सोयामील की अच्छी मांग बनी रही क्योंकि यह गैर जीएम सोयाबीन से निर्मित होता है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-दिसम्बर 2024 में देश से 14.85 लाख टन सोयामील का निर्यात हुआ था लेकिन अप्रैल-दिसम्बर- 2025 में यह 12.47 लाख टन तक ही पहुंच सका। 

जहां तक सरसों खल (रेपसीड मील) का सवाल है तो हाल के महीनों में सरसों की कम क्रशिंग होने से इसके उत्पादन में गिरावट आ गई। फरवरी-मार्च में सरसों की नई फसल की आवक शुरू होने पर क्रशिंग की रफ्तार पुनः तेज हो जाएगी। चीन के आयातक अब भारत से रेपसीड मील की खरीद में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं।