धान का क्षेत्रफल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से चावल का उत्पादन बेहतर होने के आसार

07-Oct-2025 08:38 PM

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा का भरपूर सहारा मिलने तथा सरकारी समर्थन मूल्य में इजाफा होने से इस बार भारतीय किसानों को धान का रकबा बढ़ाकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने का अच्छा अवसर और प्रोत्साहन मिला।

इसके फलस्वरूप धान का घरेलू उत्पादन क्षेत्र उछलकर 441.58 लाख हेक्येटर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया जो पिछले रिकॉर्ड रकबा 435.68 लाख हेक्टेयर से 5.90 लाख हेक्टेयर तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 403.09 लाख हेक्टेयर से 38.49 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

हालांकि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने धान के उत्पादन क्षेत्र में 50 लाख हेक्टेयर की कटौती करने का प्लान बनाया था लेकिन इसके बजाए कुल क्षेत्रफल में करीब 6 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हो गई।

उल्लेखनीय है कि धान एक मात्र ऐसा कृषि उत्पाद है जिसकी खेती देश के सभी राज्यों में होती है। जुलाई-अगस्त की भरपूर बारिश से किसानों को धान का रकबा बढ़ाने में कोई कठिनाई नहीं हुई और सितम्बर में भी वर्षा का भरपूर सहारा मिल गया।

कहीं-कहीं तेज हवा के साथ अधिशेष वर्षा होने तथा विनाशकारी बाढ़ आने से धान की फसल को थोड़ा-बहुत नुकसान हुआ है लेकिन फिर भी कुल मिलाकर इसका शानदार उत्पादन होने के आसार हैं। इससे चावल के उत्पादन में अच्छी वृद्धि होगी जिससे घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति और भी सुगम हो जाएगी। 

केन्द्रीय पूल में पहले से ही चावल का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है जबकि नए धान की सरकारी खरीद आरंभ हो गई है। पंजाब में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 5 लाख टन से अधिक धान खरीदा जा चुका है

जबकि हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी धान की सरकारी खरीद की गति शीघ्र ही तेज होने वाली है। समय गुजरने के साथ छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा एवं बिहार सहित अन्य राज्यों में भी नए धान की सरकारी खरीद बढ़ती जाएगी। 

केन्द्र सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 69 रुपए बढ़ाकर सामान्य श्रेणी के लिए 2369 रुपए प्रति क्विंटल तथा 'ए' ग्रेड के लिए 2389 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। धान की बेहतर पैदावार होने पर चावल के निर्यात योग्य स्टॉक का स्तर ऊंचा हो जाएगा।