उम्मीद के विपरीत गेहूं पर सीजन में ही भंडार सीमा लगाने का निर्णय
29-May-2025 12:10 PM
नई दिल्ली। आमतौर पर आपूर्ति के ऑफ सीजन में घरेलू बाजार भाव ऊंचा एवं तेज होने पर सरकार गेहूं पर भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) लगाने का निर्णय लेती है ताकि इसकी उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
लेकिन इस बार नए माल की आवक का सीजन जारी रहते हुए ही भंडारण सीमा का आदेश लम्बी अवधि के लिए लागू कर दिया गया है जिससे बाजार में घबराहट का माहौल पैदा हो गया है।
उल्लेखनीय है कि इस बार सरकार को पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने में सफलता प्राप्त हुई है और केन्द्रीय पूल में पहले से ही इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का अच्छा-खासा स्टॉक मौजूद था।
इससे सरकारी गोदामों में गेहूं की उपलब्धता की पोजीशन मजबूत हो गई है। वह घरेलू बाजार में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने हेतु अपने स्टॉक का इस्तेमाल कर सकती थी लेकिन इस स्टॉक को आगामी महीनों के लिए रिजर्व रखा जा रहा है।
सरकार चाहती है कि पहले व्यापारियों-स्टॉकिस्टों का गेहूं बाजार में लाया जाए और उसके बाद अपने रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल किया जाए। सरकार को लगता है कि इस बार प्राइवेट क्षेत्र द्वारा किसानों से भारी मात्रा में गेहूं खरीदा गया है और अब भी खरीदा जा रहा है।
गेहूं की खरीद का औपचारिक सीजन अप्रैल से जून के बीच रहता है। अभी मई का महीना भी समाप्त नहीं हुआ है और सरकारी खरीद लगभग बंद हो गई है।
थोक मंडियों में गेहूं की आवक जारी है लेकिन सरकारी क्रय केन्द्रों पर सन्नाटा छाने लगा है। पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में सरकारी क्रय केन्द्र बंद हो चुके हैं।
उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में क्रय केन्द्र खुले हुए तो हैं मगर वहां गेहूं की नगण्य आवक हो रही है। सरकारी एजेंसियों द्वारा 297 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद पहले ही की जा चुकी है।
स्टॉक सीमा लागू होने से व्यापारियों- स्टॉकिस्टों को नुकसान हो सकता है क्योंकि उसने न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचे दाम पर गेहूं खरीद रखा है।
समस्या यह भी है कि इस बार भंडारण सीमा से अधिक मात्रा के गेहूं को बाजार में उतारने के लिए केवल 15 दिनों का समय दिया गया है जबकि पहले एक माह का समय नियत किया जाता था। सरकार पहले व्यापारियों को खरीद के लिए प्रोत्साहित करती है और फिर उस पर शिकंजा कसने लगती है।
