उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका से ग्वार में तेजी के आसार - मूंग, मोठ की पैदावार अच्छी
25-Oct-2024 11:22 AM
आई-ग्रेन इंडिया द्वारा राजस्थान के अग्रिम किसानों में से एक श्रीपाल सारस्वत जी से राजस्थान में खरीफ फसलों की जानकारी ली गई। बताया गया कि वर्ष 2024 के खरीफ सीजन के दौरान ग्वार का बिजाई क्षेत्र घटने तथा गंगानगर, हनुमानगढ़, हरियाणा में औसत उपज दर में कमी आने से उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका सामने आ रही है। आमदनी का पीक सीजन समाप्त होने के बाद बाजार तेज होने की उम्मीद है।
व्यापारिक गणना के मुताबिक 24 अक्टूबर 2023 तक नये सीजन में करीब 15 लाख क्विंटल ग्वार मंडियो में आया था, जो इस साल 24 अक्टुबर 2024 तक की गणना के मुताबिक करीब 5 लाख क्विंटल ग्वार ही आया है।
गंगानगर, हनुमानगढ़ व हरियाणा में पिछले साल करीब 35 लाख क्विंटल ग्वार उत्पादन हुआ था, जो इस बार 15 लाख क्विंटल से कम रहने का अनुमान है।
पिछले साल ग्वार मंडियो में 5,300 से 5,500 रुपये तक के भाव किसानों का ग्वार बिक रहा था जो इस बार 5,000 रुपये के आसपास चल रहा है, ग्वार में चंद लोगों द्वारा सट्टेबाजी कर किसानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और सीजन में कमजोर फसल के बावजूद वायदा में भावों को दबाकर किसानों का ग्वार सस्ते भावों पर बिकवाने का काम किया जा रहा है।
दूसरी ओर राजस्थान में मूंग का शानदार उत्पादन हुआ है। पिछले साल की तुलना में इस बार जहां एक ओर ग्वार की आवक में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है वहीं दूसरी ओर मूंग की आपूर्ति करीब 2-3 गुना ज्यादा हो हुई है।
बारानी ऐरिया में मोठ की पैदावार भी अच्छी हुई है मगर ग्वार की बिजाई भी इस बार शुरूआती दौर (जून) में ही कमजोर रही और बाद में नहरी किसानों ने इसकी दोबारा बिजाई करने के बजाए मूंग की खेती पर ज्यादा ध्यान दिया।
श्रीपाल सारस्वत जी ने बताया वर्ष 2022 में भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी, जब बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आ गया था। इस बार राजस्थान में मूंग का शानदार उत्पादन के कारण मंडियों में इसकी भारी आवक हो रही है।
इसी तरह वहां मोठ की पैदावार भी बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले साल जुलाई के अंतिम दिनों से लेकर सितम्बर के प्रथम सप्ताह तक करीब 55 दिनों तक सूखे का माहौल रहने के बाद सितम्बर के दूसरे सप्ताह से अच्छी बारिश होने लगी जिससे ग्वार की बर्बाद होती फसल को नया जीवनदान मिल गया था, लेकिन इस बार सितम्बर का महीना सूखा रहा जो बारानी फसल के लिए घातक साबित हुआ।
जहां तक चालू रबी सीजन का सवाल है तो राजस्थान में निस्संदेह गेहूं, चना तथा सरसों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा रहेगी लेकिन कीमतों के परिदृश्य को देखते हुए एक विश्लेषक का मानना है कि राज्य में बिजाई क्षेत्र की प्राथमिकता की दृष्टि से चना पहले नम्बर पर तथा गेहूं दूसरे स्थान पर रह सकता है जबकि सरसों के क्षेत्रफल में ज्यादा उतार-चढ़ाव आने की संभावना नहीं है।
एक समस्या यह है कि बांधों-जलाशयों में पानी का भंडार कम है जिससे रबी फसलों की सिंचाई में कठिनाई हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में बारिश कम हुई जिससे राजस्थान के डैम में जलस्तर घट गया।
राजस्थान मूंग, ग्वार और सरसों का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है जबकि वहां गेहूं एवं चना का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है। सरकार ने रबी फसलों के समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी कर दी है। गेहूं तथा चना का भाव आकर्षक स्तर पर चल रहा है।
राजस्थान में सरसों की बिजाई के लिए अक्टूबर में मौसम पूरी तरह अनुकूल नहीं रहा जिससे सरसों बिजाई प्रभावित हुई है।
पिछले वर्षों में अक्टूबर महिनें की शुरुआत में पश्चिमी राजस्थान में सरसों की बिजाई शुरू हो जाती थी जो इस साल लेट चल रही है।
