उत्तरी भारत में त्यौहारी अवकाश से कालीमिर्च का भाव स्थिर

24-Oct-2025 01:42 PM

कोच्चि। कीमतों में तेजी-मजबूती का रुख बरकरार रहने के बावजूद कालीमिर्च का कारोबार पहले बेहतर ढंग से हो रहा था लेकिन बाद में त्यौहारी अवकाश के कारण उत्तरी भारत में इसकी मांग कमजोर पड़ गई। दीपावली के बाद प्रमुख खपत केन्द्रों में कारोबार सुस्त देखा जा रहा है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार उत्तरी भारत के खरीदार अब भी छुट्टी मानाने के मूड में है और चालू सप्ताह के बाद ही कालीमिर्च के कारोबार में कुछ वृद्धि हो सकती है।

सीमित कारोबार के बावजूद कीमतों में नरमी का माहौल नहीं देखा जा रहा है बल्कि इसमें दैनिक आधार पर 100 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी हो रही है।

कोच्चि के टर्मिनल मार्केट में अन गार्बल्ड श्रेणी की कालीमिर्च का दाम सुधरकर 69,300 रुपए प्रति क्विंटल तथा गार्बल्ड किस्म का भाव 71,300 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।

कीमतों में इस वृद्धि का प्रमुख कारण मसाला निर्माताओं की मजबूत मांग है जो अपने उत्पादन की जरूरत को पूरा करने के लिए अधिक मात्रा में कालीमिर्च की खरीद कर रहे हैं। 

भारतीय कालीमिर्च एवं मसाला व्यापार संघ (इप्सता) के अनुसार अमरीका की ओर से शुल्क कटौती के कुछ अच्छे संकेत मिल रहे हैं जिससे वहां भारत से कालीमिर्च का निर्यात पुनः जोर पकड़ने की उम्मीद की जा रही है।

इससे बाजार में उत्साह का माहौल है। लेकिन दूसरी ओर लैटिन अमरीकी देश- ब्राजील से सस्ती कालीमिर्च का भारी आयात हो रहा है और दिसावरी बाजारों में उच्च बल्क घनत्व वाले माल का दाम 750 रुपए प्रति किलो के आसपास चल रहा है।

इससे वहां स्वदेशी कालीमिर्च का कारोबार प्रभावित होने लगा है। तमिलनाडु, वायनाड एवं कूर्ग में उत्पादित कालीमिर्च की मांग दिसावरी बाजारों में कमजोर पड़ने लगी है 

ब्राजील में कालीमिर्च का भाव 6000 डॉलर प्रति टन बताया जा रहा है जबकि भारत में स्वदेशी कालीमिर्च का दाम 8000 डॉलर प्रति टन के करीब चल रहा है। 

एक सर्वेक्षण के आधार पर कृषि विभाग ने 2025-26 सीजन के लिए कालीमिर्च के घरेलू उत्पादन अनुमान को 1.10 लाख टन से घटाकर अब 85 हजार टन निर्धारित कर दिया है।

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मानसून के सक्रिय हो जाने से कालीमिर्च के उत्पादकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि कई क्षेत्रों में तेज हवा के साथ भारी वर्षा होने से फसल को नुकसान होने की आशंका है जिससे कालीमिर्च के उत्पादन में और गिरावट आ सकती है।