उड़द की सरकारी खरीद 50 हजार टन से ऊपर पहुंची

21-Jan-2026 05:20 PM

नई दिल्ली। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उड़द की सरकारी खरीद 2025-26 के वर्तमान खरीफ मार्केटिंग सीजन में अब तक 50 हजार टन से ऊपर पहुंच चुकी है और इसकी प्रक्रिया अभी जारी है। वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार आगामी समय में 50 हजार टन अतिरिक्त उड़द की खरीद का प्रयास किया जाएगा। लेकिन उत्पादन में आ रही गिरावट से सरकार चिंतित है क्योंकि इससे खरीद की प्रक्रिया को धक्का लग सकता है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यद्यपि कम से कम 50 हजार टन अतिरिक्त उड़द की खरीद का प्लान बनाया गया है लेकिन सरकार अपनी सीमा से भली भांति अवगत है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उड़द का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे होना चाहिए, इसकी अच्छी आपूर्ति होनी चाहिए और सरकारी क्रय केन्द्रों पर आवक बढ़नी चाहिए। कमजोर उत्पादन को देखते हुए आगामी समय में उड़द की सरकारी खरीद में ज्यादा इजाफा होना मुश्किल लगता है। सरकारी नियम के अनुसार उपभोक्ता मामले मंत्रालय के पास करीब 4 लाख टन उड़द का बफर स्टॉक होना आवश्यक है।

पिछले कुछ वर्षों से उड़द के घरेलू उत्पादन में गिरावट का सिलसिला जारी है जिससे विदेशों से इसके आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। भारत में उड़द का आयात मुख्यतः म्यांमार एवं ब्राजील से होता है। आधिकारिक आकड़ों के अनुसार उड़द का घरेलू उत्पादन 2021-22 के सीजन में 28 लाख टन पर पहुंचा था जो 2022-23 में गिरकर 26 लाख टन, 2023-24 में घटकर 23 लाख टन तथा 2024-25 सीजन में फिसलकर 22 लाख टन पर आ गया। उल्लेखनीय है कि भारत में उड़द का उत्पादन खरीफ एवं रबी दोनों सीजन में होता है।

2025-26 के मौजूदा सीजन में भी उड़द का उत्पादन घटने की सम्भावना है। रबी सीजन में इसका बिजाई क्षेत्र 6 प्रतिशत घटकर 4.58 लाख हेक्टेयर रह गया है। सरकार ने 2025-26 के सम्पूर्ण सीजन में करीब 22 लाख टन उड़द के उत्पादन का अनुमान लगाया है जो 2024-25 सीजन के उत्पादन के लगभग बराबर ही है। भारत सरकार ने म्यांमार से 2.5 लाख टन उड़द एवं 1.00 लाख टन तुवर के सालाना शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा अगले पांच साल के लिए बढ़ाने का निश्चय किया है ताकि घरेलू प्रभाग में इस महत्वपूर्ण दलहन की बेहतर उपलब्धता बरकरार रह सके।