उठते-गिरते अंततः दलहनों का रकबा गत वर्ष से ऊपर पहुंचा
07-Oct-2025 06:18 PM
नई दिल्ली। खरीफ कालीन दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने में पहले संदेह बना हुआ था क्योंकि तुवर, उड़द, मूंग एवं कुलथी आदि की बिजाई पीछे चल रही थी। लेकिन धीरे-धीरे खासकर उड़द की बिजाई ने रफ्तार पकड़ ली और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से 6.5 प्रतिशत आगे निकल गया।
इसी तरह तुवर का रकबा 15 हजार हेक्टेयर बढ़ गया। लेकिन मूंग एवं मोठ की बिजाई कुछ पीछे रह गई। कुल मिलाकर खरीफ कालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 119.04 लाख हेक्टेयर से 1.37 लाख हेक्टेयर बढ़कर इस बार 120.41 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा लेकिन फिर भी पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 129.61 लाख हेक्टेयर से 9.20 लाख हेक्टेयर पीछे रह गया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 46.65 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 46.60 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का बिजाई क्षेत्र 22.87 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 24.37 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इसी तरह कुलथी का रकबा भी 56 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 72 हजार हेक्टेयर हो गया लेकिन मूंग का बिजाई क्षेत्र 34.96 लाख हेक्टेयर से गिरकर 34.87 लाख हेक्टेयर और मोठ का क्षेत्रफल 9.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.24 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
खरीफ सीजन की अन्य दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 4.58 लाख हेक्टेयर से सुधरकर इस बार 4.62 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
बेशक उड़द की वजह से दलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में 1.37 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है लेकिन उत्पादन बढ़ने में संदेह है क्योंकि मूंग मोठ एवं उड़द की फसल को प्रमुख उत्पादक राज्यों में बाढ़ वर्षा एवं जल जमाव से नुकसान हुआ है और अब भी हो रहा है।
कहीं-कहीं तुवर की फसल भी क्षतिग्रस्त हुई है। बेमौसमी वर्षा से मूंग के दाने की क्वालिटी खराब होने की आशंका है। प्राकृतिक आपदाओं से दलहनों की उपज दर पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
दलहनों का घरेलू बाजार भाव काफी हद तक स्थिर हो गया है और पीक त्यौहारी सीजन के बावजूद कीमतों में कोई अप्रत्याशित तेजी नहीं देखी जा रही है। समझा जाता है कि घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए देश में दलहनों का अभी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
