ऊंचे बाजार भाव के कारण उड़द की सरकारी खरीद नगण्य

20-Nov-2024 06:11 PM

मुम्बई । यद्यपि विदेशों और खासकर म्यांमार से भारी आयात के साथ-साथ घरेलू प्रभाग से उत्पादित उड़द के नए माल की आवक भी प्रमुख मंडियों में हो रही है लेकिन फिर भी इसका भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है।

इसका एक खास कारण यह है कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने इस वर्ष खरीफ सीजन में उड़द का उत्पादन घटकर 12.10 लाख टन पर सिमट जाने का अनुमान लगाया है जो पिछले साल के उत्पादन 16.05 लाख टन से 3.95 लाख टन कम तथा गत 10 वर्षों का न्यूनतम स्तर है।

इससे पूर्व वर्ष 2015 में सबसे कम 12.50 लाख टन तथा 2017 में सबसे अधिक 27.50 लाख टन उड़द का उत्पादन हुआ था जबकि वर्ष 2023 तक का उत्पादन इसके बीच रहा। 

31 मार्च 2025 तक उड़द के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई है जबकि जानकारों का मानना है कि इसकी अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है।

उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 7400 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया हैं जबकि प्रमुख उत्पादक राज्यों की थोक मंडियों में इसका भाव इससे ऊपर चल रहा है। म्यांमार से आयातित उड़द का दाम भी ऊंचा बैठ रहा है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2024 के खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुल 8,20,310  टन उड़द की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसके तहत उत्तर प्रदेश में 4.30 लाख टन, राजस्थान में 1,49,240 टन, महाराष्ट्र में 1,08,120 टन, गुजरात में 50,970 टन, तमिलनाडु में 27,570 टन, कर्नाटक में 19,760 टन, आंध्र प्रदेश में 29,540 टन, तेलंगाना में 5050 टन तथा हरियाणा में 60 टन की खरीद का लक्ष्य नियत हुआ है।

लेकिन ऊंचे मंडी भाव के कारण 18 नवम्बर 2024 तक केवल राजस्थान में 14.10 टन उड़द की खरीद संभव हो सकी। किसी अन्य राज्य में सरकारी क्रय केन्द्रों पर उड़द का माल नहीं पहुंच रहा है क्योंकि किसानों को खुले बाजार में ही इससे ऊंचा दाम प्राप्त हो रहा है। कुछ राज्यों में जनवरी-फरवरी तक उड़द की खरीद चलती रहेगी।