वर्ष 2027 तक दलहनों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल
02-Aug-2024 04:27 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने वर्ष 2027 तक दलहनों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने तथा वर्ष 2028 से इसका आयात पूरी तरह रोक देने का लक्ष्य नियत किया है लेकिन इसे प्राप्त करना आसान नहीं होगा।
इसमें कोई शक नहीं कि भारत दुनिया में दलहनों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है लेकिन साथ ही साथ यह भी सच है कि यहां दलहनों की खपत भी सबसे ज्यादा होती है और यह लगातार बढ़ती जा रही है।
इसके फलस्वरूप देश में विदेशों से विशाल मात्रा में दलहनों का आयात करना पड़ता है। सरकार ने पांच प्रमुख दलहनों को आयात शुल्क से मुक्त कर दिया है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश में दलहनों का आयात बढ़कर 45 लाख टन से ऊपर पहुंच गया जिस पर विशाल धनराशि खर्च हुई।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों का कहना है कि दलहनों की मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर इतना ज्यादा बढ़ गया है कि निकट भविष्य में इसे पाटना बहुत मुश्किल है।
इसके लिए सरकार को अनेक मोर्चे पर गंभीर प्रयास करना होगा। जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ती आबादी की चुनौती भी गंभीर है।
भारत को एक संवर्धन एवं दीर्घकालीन नीति बनाने की आवश्यकता है ताकि दलहनों के उत्पादन में निरंतर बढ़ोत्तरी को सुनिश्चित किया जा सके।
दलहनों के घरेलू उत्पादन में पिछले एक दशक से भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है जबकि मांग एवं खपत में अनवरत बढ़ोत्तरी का रुख बना हुआ है।
अनेक कारणों से दलहनों की पैदावार प्रभावित हो रही है जिसे दूर करना आवश्यक है। देश में दलहनों की बिजाई तो विशाल क्षेत्रफल में होती है मगर इसकी औसत उपज दर बहुत कम है।
नए-नए उन्नत एवं ऊंची उपज दर वाले दलहन बीज का विकास एवं उपयोग होना आवश्यक है। उत्पादकों को दलहनों का लाभप्रद मूल्य मिलना जरुरी है ताकि इसकी खेती में उसका उत्साह एवं आकर्षण बरकरार रह सके।
सरकार गैर परम्परागत उत्पादक क्षेत्रों में ऐसे जिलों की पहचान कर रही है जहां खासकर तुवर एवं उड़द की व्यावसायिक खेती संभव हो सके। लेकिन इन सब प्रयासों में समय तो लगेगा ही।
