वैश्विक मांग कमजोर रहने से चावल का निर्यात ऑफर मूल्य नरम
17-Jan-2026 02:58 PM
हैदराबाद। आपूर्ति की अधिकता एवं सीमित मांग के कारण चावल के वैश्विक बाजार मूल्य में नरमी का माहौल देखा जा रहा है। भारत में रिकॉर्ड उत्पादन के कारण विशाल मात्रा में चावल का निर्यात योग्य स्टॉक मौजूद है जबकि एशिया तथा अफ्रीका के आयातक देश उसकी खरीद में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं।
चावल का निर्यात ऑफर मूल्य पहले ही घटकर काफी नीचे आ चुका है जबकि आयातक इसमें कुछ और नरमी आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
इसके फलस्वरूप चालू सप्ताह के दौरान भारत और थाईलैंड के चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में कुछ और गिरावट आ गई जबकि वियतनाम में ऑफर मूल्य स्थिर बना रहा।
चावल निर्यात के मोर्चे पर एशियाई देशों में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। 5 प्रतिशत टूटे भारतीय सेला चावल का निर्यात ऑफर मूल्य गत सप्ताह के 355-360 डॉलर प्रति टन से गिरकर अब 353-358 डॉलर प्रति टन तथा 5 प्रतिशत टूटे भारतीय सफेद चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 354 डॉलर प्रति टन से घटकर 350 डॉलर प्रति टन पर आ गया है। विश्लेषकों के अनुसार कमजोर मांग एवं रुपए के अवमूल्यन से चावल का ऑफर मूल्य नरम चल रहा है।
छत्तीसगढ़ के चावल निर्यातक संघ का कहना है कि विदेशी आयातक फिलहाल चावल की खरीद में बहुत कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं क्योंकि उन्हें इसकी कीमतों में आगे कुछ और गिरावट आने का भरोसा है।
वर्ष 2026 के दौरान चावल के वैश्विक बाजार मूल्य पर दबाव बरकरार रहने की संभावना है क्योंकि प्रमुख निर्यातक देशों के बीच अपने स्टॉक की ज्यादा से ज्यादा बिक्री करने के लिए जबरदस्त प्रतिस्पर्धा जारी रह सकती है।
एक अच्छी बात यह है कि फिलीपींस और सेनेगल जैसे देशों ने चावल के आयात पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया है। इससे वियतनाम और भारत के निर्यातकों को राहत मिलेगी।
वियतनाम में 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य पिछले सप्ताह 360-365 डॉलर प्रति टन चल रहा था और चालू सप्ताह में 362-366 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया।
थाईलैंड में भी 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य घटकर 370-375 डॉलर प्रति टन पर आ गया जो 4 दिसम्बर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
