वैश्विक निर्यात बाजार में भारतीय हल्दी के लिए चुनौती बढ़ी
18-Dec-2025 05:34 PM
हैदराबाद। हालांकि भारत दुनिया में हल्दी का सबसे प्रमुख उत्पादक, उपभोक्ता एवं निर्यातक देश बना हुआ है और लगभग 70 प्रतिशत की भागीदारी के साथ वैश्विक निर्यात बाजार पर इसका वर्चस्व भी कायम है लेकिन अब वहां वियतनाम, म्यांमार एवं कुछ अफ्रीकी देशों की चुनौती एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ने लगी है। ये देश काफी तेजी से हल्दी का उत्पादन एवं निर्यात बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
नेशनल टर्मरिक बोर्ड (एनटीबी) के सचिव का कहना है कि वैश्विक मानकों पर खरा उतरने के लिए भारत को हल्दी की क्वालिटी सुधारने की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय हल्दी को कुछ देशों में कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इन देशों में सस्ता मजदूर मिलने से हल्दी का उत्पादन खर्च कम बैठता है।
भारत को इस बात पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है कि हल्दी मेकर क्युमिन का स्तर (अंश) कैसे बढ़ाया जाए और उसमें नमी का स्तर घटाकर 10 प्रतिशत से नीचे कैसे रखा जाए। बेहतर क्वालिटी से भारत को ज्यादा राहत मिलेगी।
सचिव के अनुसार भारत के शीर्ष निर्यातक तो देश में उपलब्ध हल्दी की अधिक से अधिक मात्रा का निर्यात करने के इच्छुक है लेकिन वे विशेष रूप से उच्च क्वालिटी के बीज में मैटीरियल का उत्पादन बढ़ाने का आग्रह कर रहे हैं और इसके लिए अच्छी कृषि तकनीक तथा विधि के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। यह जरुरी नहीं है कि उत्पादित हल्दी आर्गेनिक श्रेणी की लेकिन हल्दी की खेती में समेकित कीट प्रबंधन तकनीक का इस्तेमाल होना अत्यन्त आवश्यक है।
अमरीका तथा यूरोपीय देशों में भारतीय हल्दी की खेपों को नकारने की रफ्तार बढ़ रही है जो गंभीर चिंता का विषय है। यद्यपि भारत हल्दी का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश बना हुआ है मगर वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धी एवं चुनौती का सामना करने के लिए इसे गंभीर प्रयास करने होंगे।
वियतनाम, म्यांमार तथा अनेक अफ्रीकी देश हल्दी के वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ाने की जोरदार कोशिश कर रहे हैं। भारत को इस खतरे की गंभीरता को समझना होगा और अपने प्रथम स्थान को बरकरार रखने के लिए विशेष उपाय करने होंगे।
