वैश्विक उपलब्धता में सुधार आने से चावल का निर्यात स्थिर
18-Dec-2025 08:40 PM
नई दिल्ली। विभिन्न कारणों से भारतीय चावल के निर्यात में स्थिरता का माहौल देखा जा रहा है। यद्यपि देश में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का पर्याप्त निर्यात योग्य स्टॉक मौजूद है और भारतीय मुद्रा (रुपया) की विनिमय दर घटकर काफी नीचे आ गई है जिससे वैश्विक बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ गई है
लेकिन आयातक देशों में इसकी मांग उतनी मजबूत नहीं है जितनी होनी चाहिए। बासमती चावल के साथ भी कुछ समस्या है।
अमरीका ने भारतीय चावल पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया है और ईरान अभी आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
कुछ वर्ष पूर्व ईरान भारतीय बासमती चावल का सबसे प्रमुख आयातक देश बन गया था मगर अब वहां इसका बहुत कम आयात हो रहा है।
जहां तक अमरीका का सवाल हो तो वहां भारत से चावल के होने वाले कुल वार्षिक आयात में बासमती की भागीदारी 80 प्रतिशत से अधिक रहती है। वैसे वहां चावल का कुल आयात ही कम होता है।
खाड़ी क्षेत्र एवं मध्य तथा पश्चिम एशिया के देशों में भारतीय बासमती चावल का निर्यात सामान्य ढंग से हो रहा है। इसमें सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत, बहरीन, ओमान, कतर एवं जॉर्डन जैसे देश शामिल है।
इसके अलावा यूरोपीय संघ में भी बासमती चावल मंगाया जाता है। अमरीकी बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय बासमती चावल निर्यातकों ने नए-नए बाजारों की तलाश आरंभ कर दी है और इसमें उन्हें अच्छी सफलता भी मिलने की उम्मीद है।
गैर बासमती या सामान्य श्रेणी के चावल का निर्यात प्रदर्शन कुल मिलाकर संतोषजनक चल रहा है और आगे भी इसमें गिरावट आने की संभावना क्षीण है। इसका निर्यात ऑफर मूल्य प्रतिस्पर्धी स्तर पर बरकरार है।
