आयातित दलहनों का भाव समर्थन मूल्य से ऊंचा रखने की जरूरत पर जोर

22-Sep-2025 05:24 PM

मुम्बई। स्वदेशी उद्योग- व्यापार क्षेत्र ने सरकार से इस तरह का नीतिगत कदम उठाने का आग्रह किया है जिससे विदेशों से आयातित दलहनों का भाव घरेलू प्रभाग में प्रचलित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊंचा रहे।

एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक के अनुसार वैश्विक बाजार में दाल-दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता नहीं होने से इससे सस्तेमाल का विशाल आयात हो रहा है।

सरकार को ऐसा उपाय करना चाहिए जिससे घरेलू दाल-दलहन बाजार में स्थिरता बरकरार रह सके मगर आयात इतना ज्यादा न हो जिससे दलहनों की खेती से किसान हतोत्साहित हो जाए। 

पिछले साल के मुकाबले वर्तमान समय में दलहनों का भाव घटकर काफी नीचे आ गया है। इसके तहत तुवर का दाम 38 प्रतिशत, चना का 25  प्रतिशत, मूंग का 18 प्रतिशत एवं उड़द का भाव 15 प्रतिशत नीचे चल रहा है। इससे उत्पादक काफी चिंतित और परेशान हैं। 

उद्यमियों- व्यापारियों का कहना है कि सबसे पहले पीली मटर पर आयात शुल्क को शून्य प्रतिशत के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 50 प्रतिशत निर्यात किए जाने की आवश्यकता है। दिसम्बर 2023 से पूर्व यही शुल्क दर लागू था।

केन्द्रीय कृषि मंत्री की इच्छा भी ऐसी ही है। इसके अलावा अन्य दलहनों पर भी आयात शुल्क की दर में व्यावहारिक बदलाव किया जाना चाहिए। किसी भी आयातित दलहन का दाम सरकारी समर्थन मूल्य से नीचे नहीं होना चाहिए।

हाल ही में कृषि मंत्री ने कहा था कि चना के एक सस्ते विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाली पीली मटर के विशाल आयात से दलहन बाजार का समीकरण छिन्न-भिन्न हो गया है इसलिए इस पर ऊंचे स्तर का सीमा शुल्क लगाना जरुरी है। 

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में दलहनों का सकल आयात तेजी से उछलकर 73.40 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया।

भारत में दलहनों की सकल वार्षिक मांग एवं जरूरत के 15 से 18 प्रतिशत भाग का आयात विदेशों से होने लगा है। यदि यही स्थिति रही तो वर्ष 2027 तक देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प पूरा नहीं हो पाएगा।