बिहार में जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती की विधि अपनाने पर जोर
25-Mar-2025 01:09 PM
पटना। बिहार में जलवायु परिवर्तन विभिन्न क्षेत्रों और खासकर कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है जिसे देखते हुए वहां खेती की ऐसी पद्धति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है
जो बदलते मौसम के अनुरूप हो और प्रतिकूल जलवायु परिस्थिति से कम प्रभावित हो। बिहार सरकार इस मामले में किसानों को हर संभव सहयोग- समर्थन और प्रोत्साहन देने के लिए तैयार है।
बिहार मूलत: एक कृषि प्रधान राज्य है इसलिए उस पर जलवायु परिवर्तन का विशेष असर पड़ना स्वाभाविक है। कृषि क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था कमजोर पड़ने से ग्रामीण इलाकों में आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है।
राज्य में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश की हालत अनियमित एवं अनिश्चित हो गई है और आक्रामक मौसमी घटनाएं बढ़ने लगी हैं। इन कारणों से बिहार में कृषि फसलों की उपज दर प्रभावित हो रही है।
प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 50 वर्षों से राज्य के औसत तापमान में नियमित रूप से इजाफा हो रहा है और वर्षा का पैटर्न बदल गया है। इसके फलस्वरूप कभी भीषण सूखे का संकट रहता है तो कभी भयंकर बाढ़ का प्रकोप देखा जाता है।
बिहार में उत्पादित होने वाली प्रमुख फसलों में धान, गेहूं, मक्का, मसूर एवं सरसों आदि शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन एवं ऊंचे तापमान से खासकर धान-चावल का उत्पादन आगामी वर्षों में बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
गेहूं की फसल को भी भयंकर गर्मीं से खतरा बढ़ जाएगा। मक्का एवं दलहन की फसलों को अनियमित वर्षा एवं भीषण गर्मीं के साथ-साथ कीड़ों- रोगों के प्रकोप से भी खतरा बढ़ने की आशंका कुल मिलाकर मौसमी घटनाओं का उग्र एवं आगमन होना बिहार में कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से घातक साबित होगा।
वहां जलाशय भी लगभग सूखने के कगार पर पहुंच जाता है और तेज धूप एवं कम वर्षा से फसलों को नुकसान की आशंका रहती है। कुछ क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश से भयंकर बाढ़ भी आ जाती है।
