भारत की शुल्क नीति से चावल का वैश्विक बाजार भाव नरम
31-Mar-2025 02:52 PM
हैदराबाद। वर्ष 2023 में जब भारत सरकार ने गैर बासमती सफेद चावल के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध तथा सेस पर 20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लगाया था और बासमती चावल के लिए 1250 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) लागू किया था तब वैश्विक बाजार में चावल का दाम तेजी से उछल गया था।
भारत सरकार उससे पूर्व सितम्बर 2022 में 100 प्रतिशत टूटे चावल के निर्यात पर भी पाबंधी लगा चुकी थी जिससे खासकर अफ्रीका महाद्वीप के गरीब देशों की कठिनाई बढ़ गई थी।
लेकिन घरेलू प्रभाग में उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ने तथा कीमतों में स्थिरता आने के बाद सरकार ने सभी किस्मों एवं श्रेणियों के चावल के निर्यात को सभी नियंत्रणों-प्रतिबंधों से पूरी तरह मुक्त कर दिया है।
चूंकि भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश है और वैश्विक निर्यात बाजार में 40-42 प्रतिशत का योगदान देता है
इसलिए यहां से आपूर्ति बढ़ने के साथ ही चावल का अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव नरम पड़ने लगा और अब घटकर काफी नीचे आ गया है। भारत सरकार ने अब 100 प्रतिशत टूटे चावल (ब्रोकन राइस) के निर्यात को भी खोल दिया है।
भारत द्वारा चावल के निर्यात को पूरी तरह खोले जाने के बाद वैश्विक बाजार में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ गई और कीमतों में नरमी आने लगी। 100 प्रतिशत टूटे चावल पर लागू निर्यात प्रतिबंध के हटने से कीमतों पर दबाव और बढ़ गया।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक निकट भविष्य में चावल का वैश्विक बाजार भाव काफी हद तक नरम या स्थिर रह सकता है मगर आगामी महीनों के दौरान इसमें जोरदार मांग निकलने पर कीमतों में मजबूती आ सकती है।
7 मार्च को भारत सरकार ने टूटे चावल के निर्यात को प्रतिबंध से मुक्त कर दिया। वैश्विक निर्यात बाजार में भारत को वियतनाम, थाईलैंड एवं पाकिस्तान से कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
