भयंकर बाढ़ से पंजाब में मिटटी खराब होने के कारण फसलों की उपज दर पर असर

06-Oct-2025 08:27 PM

लुधियाना। केंन्द्रीय पूल में खाद्यान्न (चावल एवं गेहूं) का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब में अगस्त- सितम्बर माह के दौरान आई भयंकर बाढ़ से खेतों की मिटटी का प्रोफाइल काफी हद तक बदल गया है

और उसकी उर्वरा शक्ति में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। खेतों में मिटटी के ऊपर रेत एवं सिल्ट की मोटी परत बिछ जाने से फसलों की औसत उपज दर में गिरावट आ सकती है जिससे उत्पादन भी स्वाभाविक रूप से प्रभावित होगा। 

लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) की एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के अनेक जिलों में यह समस्या गंभीर रूप में उपस्थित है। इसमें अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, कपूरथला एवं पटियाला जैसे जिले शामिल हैं।

अध्ययन रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि इन जिलों के विशाल भूभाग में बाढ़ के पानी के साथ ऊपरी क्षेत्र से बढ़कर सिल्ट एवं सेडीमेंट निचले इलाकों के खेतों में भर गए हैं।

कहीं-कहीं तो इसका इतना जमावड़ा हो गया है कि खेतों की वास्तविक मिटटी  एक मीटर तक नीचे चली गई है। इस जमा हुए सिस्ट का ढांचा अलग-अलग है।

कहीं बालू या रेट का टिला बन गया है जबकि अन्य जगहों पर क्रोप के रूप में यह मौजूद है। इससे मिटटी की प्रकृति एवं उर्वरा शक्ति प्रभावित हो जाएगी।  

हालांकि कुछ क्षेत्रों में जमा हुई सिल्ट में पोषक तत्व मौजूद हैं जो मिटटी के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं मगर इसका फायदा ज्यादा लम्बा चौड़ा नहीं है।

बाढ़ का पानी काफी हद तक उतर गया है और अब मानसून भी वापस लौट गया है इसलिए आगामी समय में मिटटी की स्थिति की जांच-पड़ताल और बेहतर ढंग से की जा सकेगी।

भयंकर बाढ़ एवं खेतों में जल जमाव के कारण खरीफ फसलों को नुकसान हुआ और उसकी कटाई-तैयारी में भी देर हो गई। आमतौर पर पश्चिमोत्तर भारत (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान) को कम वर्षा वाला क्षेत्र माना जाता है मगर इस वर्ष वहां पर सबसे ज्यादा बारिश हुई जिससे नदियों में उफान के साथ भयंकर बाढ़ आ गई।

खरीफ फसलों की कटाई में हो रही देरी और खेतों की मिटटी में नमी की ज्यादा मौजूदगी के कारण पंजाब में रबी फसलों और खासकर गेहूं की बोआई में विलम्ब हो सकता है जिससे उसकी उपज दर भी प्रभावित हो सकती है।