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08-Oct-2026 10:49 AM
मुम्बई। अल नीनो मौसम चक्र के प्रकोप एवं दक्षिण- पश्चिम मानसून की असमान, अनियमित एवं कमजोर बारिश के कारण इस बार गन्ना की फसल कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर इसके क्षेत्रफल में भी करीब 30-40 हजार हेक्टेयर की गिरावट आई है जबकि अनेक क्षेत्रों में फसल की हालत कमजोर बताई जा रही है। महाराष्ट्र के सूखा ग्रस्त इलाकों में हरे चारे की भारी कमी के कारण किसान गन्ना की फसल काटकर पशुओं को खिला रहे हैं। कर्नाटक में भी सूखे का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भयंकर बाढ़ से गन्ना की फसल को नुकसान होने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि गन्ना के तीनों शीर्ष उत्पादक राज्यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के साथ-साथ तमिलनाडु, गुजरात और बिहार जैसे प्रांतों के कुछ भागों में भी फसल को प्राकृतिक आपदाओं से क्षति पहुंचने की आशंका है।
इससे गन्ना की औसत उपज दर, कुल पैदावार एवं गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में कमी आने की संभावना है। चीनी मिलों को समुचित मात्रा में गन्ना प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ सकता है। अगले मार्केटिंग सीजन में भी इसकी पर्याप्त आपूर्ति होने में संदेह है जिससे चीनी मिलों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
मध्य अक्टूबर के बाद चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग शुरू होने वाली है जबकि गुड़-खांडसारी इकाइयां भी किसानों से अधिक से अधिक मात्रा में गन्ना खरीदने का प्रयास करेंगी क्योंकि गुड़ का भाव ऊंचा चल रहा है।