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रबी सीजन में पानी की कम जरूरत वाली फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद

08-Oct-2026 11:48 AM

रबी सीजन में पानी की कम जरूरत वाली फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश इस बार करीब 13 प्रतिशत कम हुई जबकि अल नीनो मौसम चक्र की हालत एवं तीव्रता क्रमिक रूप से बढ़ती जा रही है जिससे आगामी महीनों के दौरान भी देश में पर्याप्त वर्षा होने में संदेह है। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय किसान इस बार रबी सीजन में उन फसलों की खेती को प्राथमिकता दे सकते हैं जिसे सिंचाई के लिए अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता पड़ती है। इसमें चना एवं सरसों की फसल मुख्य रूप से शामिल है।

रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना, मसूर एवं मटर तथा सरसों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा कई अन्य ऐसी फसलों की बिजाई भी होती है जिसका उत्पादन खरीफ सीजन के दौरान भी होता है। इसमें मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी, मक्का एवं ज्वार आदि सम्मिलित हैं। 

मध्य प्रदेश में वर्षा का वितरण असमान रहा। वहां कुछ जिलों में काफी अच्छी बारिश हुई जबकि कुछ अन्य जिलों में सामान्य से कम या बहुत कम वर्षा दर्ज की गई। बारिश की कमी वाले जिलों में इस बार गेहूं का उत्पादन क्षेत्र काफी घटने की आशंका है। इसके बदले किसान दलहन-तिलहन फसलों की खेती पर जोर दे सकते हैं। इसके बीज की मांग में 25-30 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं। वहां अलसी एवं सैफ्लावर का रकबा बढ़ सकता है। 

महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना के किसानों की दुविधा बढ़ गई है। वहां अधिकांश इलाके भयंकर सूखे की चपेट में हैं और खेतों की मिटटी में नमी का भारी अभाव देखा जा रहा है। वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में बिजाई के लिए फसलों का चुनाव करने में किसानों को भारी कठिनाई हो सकती है। इन राज्यों में चना का उत्पादन तो बड़े पैमाने पर होता है मगर सरसों की खेती नहीं या नगण्य होती है।