ग्रीष्मकालीन फसलों का रकबा 81.60 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा
05-May-2026 12:06 PM
नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान ग्रीष्मकालीन या जायद सीजन की फसलों के रकबे में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। अब बिजाई का सीजन लगभग समाप्त हो गया है। अगले महीने से खरीफ फसलों की खेती शुरू होगी।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि जायद फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 79 लाख हेक्टेयर से 3.3 प्रतिशत बढ़कर इस बार 81.60 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। समीक्षाधीन अवधि के दौरान यद्यपि धान का क्षेत्रफल 32.42 लाख हेक्टेयर से घटकर 31.05 लाख हेक्टेयर रह गया लेकिन दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र 22.76 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 23.49 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का रकबा 14.25 लाख हेक्टेयर से उछलकर 16.01 लाख हेक्टेयर तथा तिलहन फसलों का क्षेत्रफल 9.58 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
दलहन फसलों के संवर्ग में यद्यपि मूंग का उत्पादन क्षेत्र 19 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 18.99 लाख हेक्टेयर रह गया मगर उड़द का बिजाई क्षेत्र 3.58 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.20 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसके अलावा सीमित क्षेत्रफल में कुछ अन्य दलहनों की भी बिजाई हुई।
मोटे अनाजों में बाजरा का बिजाई क्षेत्र 5.20 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 5.40 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का उत्पादन क्षेत्र 8.50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जबकि अन्य अनाजी फसलों की खेती भी हुई मगर उसका रकबा काफी कम है।
तिलहन फसलों में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 4.20 लाख हेक्येटर से बढ़कर इस बार 5.51 लाख हेक्टेयर तथा तिल का बिजाई क्षेत्र 4.96 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 5.07 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
ज्यादा फसलों की बिजाई आमतौर पर फरवरी से अप्रैल के दौरान होती है। कभी-कभी इसकी समय सीमा मई के प्रथम सप्ताह तक बढ़ जाती है। विभिन्न फसलों के रकबे में अच्छी वृद्धि हुई है जिससे कुल उत्पादन में सुधार आने के आसार हैं।
