हरियाणा एवं आसाम के बाद अब अन्य राज्यों में सरसों खरीद की तैयारी

25-Mar-2025 12:28 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नैफेड) द्वारा वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हरियाणा एवं आसाम में किसानों से सरसों की खरीद आरंभ की जा चुकी है और अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान जैसे प्रांतों में इसकी खरीद की तैयारी की जा रही है।

नैफेड के अनुसार इस वर्ष 20 मार्च तक हरियाणा एवं आसाम में कुल मिलाकर 864 टन से कुछ अधिक सरसों की खरीद की गई। 

कृषि मंत्रालय द्वारा 2025 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर 15 लाख टन सरसों की खरीद की स्वीकृति दी गई है और विभिन्न राज्यों में खरीद की मात्रा भी नियत की जा चुकी है मगर इसमें सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान शामिल नहीं है।

मंत्रालय ने मध्य प्रदेश में 4.90 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 4.79 लाख टन, हरियाणा में 3.36 लाख टन, गुजरात में 1.29 लाख टन, आसाम में 62,744 लाख टन तथा छत्तीसगढ़ में 3050 टन सरसों की खरीद के लिए मंजूरी दी है।

अगले महीने से सभी राज्यों में खरीद की प्रक्रिया आरंभ हो सकती है। राजस्थान में एमएसपी पर किसानों से खरीदी जाने वाली मात्रा का निर्धारण होना अभी बाकी है। 

सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2023-24 सीजन के 5650 रुपए प्रति क्विंटल से 300 रुपए बढ़ाकर 2024-25 सीजन के लिए 5950 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है जबकि राजस्थान में सामान्य औसत क्वालिटी वाली सरसों का मॉडल मूल्य 5200-5350 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।

मालूम हो कि इसी मॉडल मूल्य पर सर्वाधिक कारोबार होता है। राजस्थान में एक बार फिर 50 लाख टन से अधिक सरसों का उत्पादन होने का अनुमान है।

वहां नई फसल की जोरदार आपूर्ति शुरू हो चुकी है और इस बार दाने की क्वालिटी अच्छी बताई जा रही है। इसमें तेल का ज्यादा अंश मौजूद है। इससे सरसों तेल का बेहतर उत्पादन होने की उम्मीद है। 

केन्द्र सरकार ने अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन के दौरान सरसों का घरेलू उत्पादक घटकर 128.73 लाख टन पर सिमट जाने की संभावना व्यक्त की है जो 2023-24 सीजन के उत्पादन 132.59 लाख टन से करीब 3 लाख टन कम है।