हरियाणा में सीएमआर चावल की नई नीति से मिलर्स चिंतित

22-Sep-2025 04:12 PM

करनाल। हरियाणा में खरीफ कालीन धान की नई फसल की कटाई-तैयारी जल्दी ही जोर पकड़ने की सम्भावना है और फिर इसकी सरकारी खरीद आरंभ हो जाएगी। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे जाने वाले धान को कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को आवंटित किया जाएगा और राइस मिलर्स इससे निर्मित चावल की आपूर्ति सरकारी एजेंसियों को करते रहेंगे। यह प्रक्रिया प्रत्येक साल संचालित होती है और राज्य सरकार अक्सर कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के बारे में नीतियों में कुछ बदलाव करती रहती है। सीएमआर नीति में इस बार जो परिवर्तन किया गया है उसमें राइस मिलर्स को भारी झटका लगने की आशंका है इसलिए वे इसका जोरदार विरोध कर रहे हैं।
नई परिवर्तित (संशोधित) नीति के तहत राइस मिलर्स को धान के आवंटन के बाद निश्चित समय सीमा के अन्दर चावल की आपूर्ति करने का सख्त निर्देश दिया गया है अन्यथा उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा जिस चावल की डिलीवरी की जाएगी उसमें टूटे दाने का अंश 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए जबकि पहले 25 प्रतिशत तक के टूटे दाने के अंश को स्वीकार किया जाता था। शेष चावल की बिक्री में मिलर्स को कठिनाई हो सकती है। दरअसल केंद्र सरकार सार्वजानिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत अच्छी क्वालिटी के चावल की आपूर्ति करना चाहती है और इसके लिए प्रमुख उत्पादक राज्यों के वास्त आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गये हैं। हरियाणा के राइस मिलर्स को सरकार के एक और नियम से तगड़ा झटका लगने वाला है। इसके तहत गोदाम में धान ले जाने के लिए उसे किसी परिवहन खर्च का भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया गया है। इससे राइस मिलर्स के मार्जिन में भारी कमी आ जाएगी।