कपास के उत्पादन एवं निर्यात में पिछड़ रहा है भारत

31-Mar-2025 03:26 PM

मुम्बई। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय कपास (रूई) के उत्पादन एवं निर्यात में गिरावट का सिलसिला बना हुआ है जबकि विदेशों से इसके आयात पर निर्भरता बढ़ रही है।

किसानों को लाभप्रद मूल्य प्राप्त नहीं होने से कपास की खेती के प्रति इसका उत्साह एवं आकर्षण घटता जा रहा है। दूसरी ओर विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं प्रतिकूल मौसम एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से भी कपास की फसल को अक्सर नुकसान हो जाता है जिससे किसानों की आमदनी घट जाती है।

कमजोर बाजार भाव का आलम ऐसा है कि 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में घरेलू उत्पादन घटकर 300 लाख गांठ से भी नीचे आने के बावजूद मार्केटिंग एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को किसानों से करीब 100 लाख गांठ की खरीद करनी पड़ी।

यह खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की गई और खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है। इसका मतलब यह हुआ कि कपास उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त करने के लिए भी कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। 

पिछले एक दशक से कपास क्षेत्र विभिन्न मुसीबतों का सामना कर रहा है। इससे उत्पादन, उपयोग, आयात- निर्यात एवं भाव पर स्वाभाविक रूप से असर पड़ता है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2002-03 से 2013-14 के दौरान कपास का घरेलू उत्पादन 136 लाख गांठ से लगभग तीन गुना उछलकर 398 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया मगर अगले एक दशक में यानी 2024-25 के सीजन में यह 100 लाख गांठ से अधिक घटकर 294 लाख गांठ पर अटक गया।

2002-03 से पूर्व के तीन मार्केटिंग सीजन के दौरान देश में औसतन 22 लाख गांठ रूई का वार्षिक आयात हुआ जबकि देश से इसका निर्यात एक लाख गांठ तक भी नहीं पहुंच सका।

लेकिन वर्ष 2013-14 तक आते-आते यह स्थिति पूरी तरह बदल गई। जहां एक ओर विदेशों से आयात घटकर 11 लाख गांठ पर आ गया वहीं दूसरी ओर देश से रूई का निर्यात 100 गुना से भी ज्यादा उछलकर 116 लाख गांठ के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। 

2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के दौरान देश में कपास का उत्पादन घटकर 294-295 लाख गांठ पर सिमट जाने का अनुमान लगाया गया है जो 2008-09 सीजन के उत्पादन 290 लाख गांठ के बाद सबसे निचला स्तर है।

इसी तरह चालू सीजन में रूई का आयात उछलकर 30 लाख गांठ तथा निर्यात घटकर 17 लाख गांठ पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई है।

भारत 2015-16 के सीजन में दुनिया में कपास का सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया था जबकि उससे पूर्व यह 2011-12 के मार्केटिंग सीजन में अमरीका के काफी निकट पहुंच कर संसार में रूई का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश बना था मगर अब सभी मोर्चे पर काफी पिछड़ गया है।