कर्नाटक में तुवर दाल का भाव घटने से उपभक्ताओं को राहत
25-Mar-2025 01:54 PM
बंगलोर। तुवर (अरहर) के एक अग्रणी उत्पादक राज्य- कर्नाटक में इस महत्वपूर्ण दलहन एवं इससे निर्मित दाल का भाव घटकर पिछले दो साल के नीचे स्तर पर आ गया है जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है। अक्टूबर 2024 से ही साबुत तुवर एवं इसकी दली दाल की कीमतों में नरमी का माहौल बना हुआ है।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार उच्च क्वालिटी की तुवर दाल का थोक बाजार भाव 57 से 61 प्रतिशत तक घट गया है। विभिन्न ब्रांडों के दाम में अलग-अलग स्तर की गिरावट आई है।
इसी तरह चना दाल के मूल्य में भी थोड़ी नरमी आई है जिससे त्यौहारी (उगाड़ी) सीजन में आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 2024-25 में फसल की प्रगति के सीजन में मौसम की हालत अनुकूल रहने तथा बिजाई क्षेत्र में वृद्धि होने से तुवर के उत्पादन में इजाफा हुआ है।
नए माल की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर दबाव पड़ने लगा। 2024-25 के वित्त वर्ष में विदेशों से तुवर का आयात भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बाजारी शक्तियों ने कीमतों को घटा दिया। इससे तुवर दाल की खुदरा कीमतों में भी गिरावट आ गई।
यशवंतपुर कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) के परिसर में तुवर एवं इसकी दाल की कीमतों में काफी कमी आ गई है।
एक अग्रणी थोक व्यापारी के अनुसार प्रीमियम क्वालिटी की तुवर दाल (शिवलिंगा) का भाव घटकर 101 से 122 रुपए प्रति किलो के बीच आ गया है जबकि कुछ माह पूर्व यह 175 से 200 रुपए प्रति किलो के उच्च स्तर पर चल रहा था।
तुवर दाल का मौजूदा मूल्य वर्ष 2023 के बाद का सबसे निचला स्तर है। थोक व्यापारी के मुताबिक मोजाम्बिक, जिम्बाब्वे,
म्यांमार तथा मलावी आदि देशों से आयातित तुवर की प्रोसेसिंग से निर्मित दाल का दाम भी स्वदेशी दाम के लगभग बराबर ही है। पिछले दो वर्षों से आयातीत तुवर का दाम घरेलू उत्पाद से काफी ऊपर चल रहा था।
भारत में तुवर दाल के प्रमुख प्रोसेसिंग केन्द्र कर्नाटक के कलबुर्गी एवं रायचूर, महाराष्ट्र के लातूर, अकोला एवं सोलापुर, गुजरात के बलसाड तथा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में स्थित हैं।
