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30-Sep-2026 10:40 AM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में क्रूड तथा रिफाइंड श्रेणी के पाम तेल एवं सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क में 5 प्रतिशत बिंदु और क्रूड तथा रिफाइंड सूरजमुखी तेल के आयात पर सीमा शुल्क में 10 प्रतिशत बिंदु की कटौती की गई है जिसका उद्देश्य विदेशों से खाद्य तेलों के आयात को सस्ता बनाना तथा घरेलू प्रभाग में इसकी कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाना है लेकिन इन दोनों उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सीमा शुल्क में हुई इस कटौती को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि अमरीकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया की विनिमय दर घटकर काफी नीचे आ गई है और विदेशों में विभिन्न खाद्य तेलों का दाम भी ऊंचा चल रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव के अनुरूप सरकार इसके शुल्क आधारित बुनियादी आयात मूल्य (टैरिफ वैल्यू) को घटाती-बढ़ाती रहती है। इसके अलावा पीक त्यौहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों की घरेलू मांग एवं खपत में बढ़ोत्तरी हो जाती है जिससे कीमत भी ऊंची एवं तेज रहती है।
लेकिन केन्द्रीय कृषि मंत्री का कहना है कि सरकार को तिलहन-तेल क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखना पड़ता है जिसमें तिलहन उत्पादक किसान, खाद्य तेल उद्योग एवं आम उपभोक्ता शामिल है। खरीफ कालीन तिलहन फसलों के नए माल की जोरदार आपूर्ति अगले कुछ सप्ताहों में आरंभ होने वाली है और किसानों को कम से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य अवश्य मिलना चाहिए।
दूसरी ओर आम लोगों को भी उचित मूल्य पर खाद्य तेलों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होना आवश्यक है। उद्योग से कहा गया है कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में हुई कटौती का लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। सरकार बाजार पर नजर रख रही है।