लोकसभा अध्यक्ष द्वारा खाद्य तेलों का आयात घटाने की जरूरत पर जोर

24-Mar-2025 02:01 PM

आगरा। तिलहन-तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के शीर्ष संगठन-सेन्ट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कोएट) तथा मस्टर्ड ऑयल प्रोसेसर्स एसोसिएशन (मोपा) के तत्वाधान में उत्तर प्रदेश ऑयल मिलर्स एसोसिएशन द्वारा ताज नगरी आगरा मे आयोजित 45 वें अखिल भारतीय तिलहन-तेल सेमिनार को सम्बोधित करते हुए

लोकसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिड़ला ने कहा है कि विदेशो से विशाल मात्रा में खाद्य तेलों का आयात हो रहा है जिसे घटाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। 

सेमिनार में तिलहन-तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र से जुड़े देश भर से 1200 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित थे। ओम बिड़ला का कहना था कि भारतीय मिट्टी  की अनोखी विशेषता के कारण इसमें उत्पादित होने वाले तिलहनों तथा उसकी क्रशिंग-प्रोसेसिंग से निर्मित खाद्य तेल की क्वालिटी दुनिया में सर्वोत्तम होती है

यह खाद्य तेल स्वाद और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेजोड़ होता है। इसे वैश्विक मंच पर समुचित स्थान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।

किसानो तथा उद्यमियों को पारस्परिक एकजुटता के साथ इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और सरकार उसमे हर संभव सहयोग समर्थन एवं प्रोत्साहन देने के लिए तैयार है। तिलहन-तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाना अत्यन्त आवश्यक है। 

इस सेमिनार में मुख्य अतिथि ओम बिड़ला  के साथ-साथ केन्द्रीय मंत्री, संसद, विधायक, कोएट के अध्यक्ष, मोपा के अध्यक्ष तथा यूपी मोपा के अध्यक्ष के साथ-साथ तमाम उद्यमी, व्यापारी तथा अन्य संबंधित प्रतिनिधि मौजूद थे।

उत्तर प्रदेश ऑयल मिलर्स एसोसिएशन (यूपी ओमा) के अध्यक्ष ने अपने स्वागत उद्बोधन में सेमिनार के कार्यक्रमों का प्रारूप प्रस्तुत किया।

इसमें कहा गया है कि भारत अत्यन्त विशाल देश है और यहां खाद्य तेलों का रिकॉर्ड आयात हो रहा है। इस पर अंकुश लगाए जाने की जरूरत है।

सरसों के उत्पादकों एवं क्रशर्स-प्रोसेसर्स द्वारा समेकित प्रयास किए जाने पर न केवल बेहतरीन खाद्य तेल प्राप्त होगा बल्कि उत्पादन में बढ़ोत्तरी के जरिए इसके आयात को रोकने में भी मदद मिलेगी। 

मुख्य अतिथि ओम बिड़ला ने अपने सम्बोधन में कहा कि देश में घरेलू मांग एवं जरूरत के अनुरूप खाद्य तेल का उत्पादन नहीं होने से विदेशो से इसमें भारी आयात की आवश्यकता पड़ती है।

यदि स्वदेशी स्रोतों से उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोत्तरी हो जाये तो आयात पर अंकुश लग सकता है। खाद्य तेलों का आयात रोकना या घटाना सबसे बड़ी चुनौती है और इसका समाधान निकालना बहुत जरूरी है।

उनका कहना था कि बदलते दौर में किसानो को अधिकारिक उत्पादन के लिए प्रेरित-प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

इन्हे अपने उत्पाद का लाभप्रद मूल्य अवश्य मिलना चाहिए। सरसों का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जाना चाहिए।