मानसूनी बारिश की अधिकता एवं बाढ़ से खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका
16-Jul-2024 08:23 PM
नई दिल्ली । हालांकि दक्षिण- पश्चिम मानसून की वर्षा को खरीफ फसलों का लाइफ लाइन माना जाता है लेकिन जब इसका वितरण आसमान होता है तब वह फसलों के लिए घातक बन जाता है।
चालू वर्ष के दौरान भी कुछ ऐसा ही नजारा देखा जा रहा है। एक तरफ झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा एवं केरल के साथ-साथ पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में भी मानसून की वर्षा दीर्घकालीन औसत से कम हुई है जबकि दूसरी ओर उत्तर प्रदेश, बिहार एवं आसाम जैसे राज्य भयंकर बाढ़ की चपेट में फंसे हुए हैं।
बाढ़ ग्रस्त इलाकों में एक तो बोई गई फसलें बर्बाद हो जाएंगी और दूसरे, वहां नई बिजाई के लिए समय भी कम बचेगा क्योंकि धान को छोड़कर अन्य खरीफ फसलों की बिजाई के लिए खेतों में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए।
ध्यान देने की बात है कि उत्तर प्रदेश एवं बिहार में आई बाढ़ के लिए सिर्फ मानसून की वर्षा जिम्मेदार नहीं है बल्कि नेपाल से विभिन्न नदियों में छोड़ा गया पानी भी इसके लिए जवाबदेह है।
भारत में नेपाल से आने वाली अधिकांश नदियों के मूल उद्गम क्षेत्र में जोरदार वर्षा होने से आपदा बढ़ी है। खेतों में जल जमाव के छिटपुट उदहारण महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भी देखा जा सकता है।
वैसे राष्ट्रीय स्तर पर खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से काफी आगे चल रहा है। जिन इलाकों में मानसून की सामान्य बारिश हुई है वहां फसलों की जोरदार बिजाई जारी है। धान, दलहन, तिलहन, कपास एवं गन्ना का रकबा बढ़ा है।
इसी तरह मोटे अनाजों में मक्का की खेती के प्रति किसनों में भारी उत्पाद देखा जा रहा है। जुलाई माह में सबसे अधिक वर्षा तथा खरीफ फसलों की सर्वाधिक बिजाई होने की परिपाटी रही है।
