मानसून की अच्छी वर्षा से धान का उत्पादन क्षेत्र बढ़ने के आसार

17-Jul-2024 10:41 AM

नई दिल्ली । धान एक मात्रा ऐसा कृषि उत्पाद है जिसकी खेती देश के सभी राज्यों में होती है जिसमें सुदूर दक्षिणी प्रान्त केरल, पूर्वोत्तर भारत के सीमांत राज्य- अरुणाचल प्रदेश एवं सिक्किम, पश्चिमोत्तर क्षेत्र के सबसे अन्तिम प्रांत- राजस्थान, जम्मू कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश तथा पश्चिमी भाग के गुजरात भी शमिल हैं।

देश के सभी आंतरिक राज्यों में धान का उत्पादन होता है। इसके प्रमुख उत्पादक प्रांतों में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, हरियाणा, बिहार मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, आसाम एवं तमिलनाडु आदि शामिल है। 

केन्द्र सरकार ने एक बार फिर 2024-25 सीजन के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी कर दी है जबकि इसका खुला बाजार भाव भी ऊंचा चल रहा है।

इसके अलावा चालू वर्ष के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून काफी सक्रिय देखा जा रहा है और देश के विभिन्न भागों में अच्छी वर्षा हो रही है। इससे किसानों को धान की रोपाई करने में सहायता मिल रही है।

वैसे झारखंड, उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मानसून की बारिश कम हुई है और तेलंगाना, पंजाब तथा हरियाणा के कुछ भागों में भी वर्षा का अभाव देखा जा  रहा है मगर आगामी समय के दौरान इन प्रांतों में सामान्य बारिश होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।  

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर 15 जुलाई तक धान का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 115.64 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो वर्ष 2023 की समान अवधि के क्षेत्रफल 95.78 लाख हेक्टेयर से करीब 20 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

दरअसल पिछले साल मानसून की हालत कमजोर रही थी और धान की रोपाई में बाधा पड़ रही थी। इसके फलस्वरूप रोपाई की गति धीमी रही थी।

उससे पूर्व की इसी तिथि (15 जुलाई) तक धान का उत्पादन क्षेत्र वर्ष 2022 में 128.50 लाख हेक्टेयर तथा वर्ष 2021 में 155.53 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था जिसके मुकाबले 2024 का उत्पादन क्षेत्र काफी पीछे चल रहा है।

उम्मीद की जा रही है कि जुलाई अगस्त के दौरान मानसून की भरपूर वर्षा होगी और किसानों को धान की रोपाई की गति बढ़ाने का अच्छा अवसर मिलेगा। इससे उत्पादन क्षेत्र बढ़कर सामान्य औसत क्षेत्रफल के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकता है।