मानसून की अधिशेष वर्षा से खरीफ फसलों को भारी नुकसान की आशंका

06-Oct-2025 04:58 PM

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून के चार माह- जून से सितम्बर की अवधि में देश के विभिन्न राज्यों में अत्यन्त मूसलाधार वर्षा होने, खेतों में पानी भरने और विनाशकारी बाढ़ का तांडव रहने से खरीफ फसलों को भारी नुकसान होने के संकेत मिल रहे हैं

जिससे केन्द्र सरकार को अपने उत्पादन अनुमान में कटौती करनी पड़ सकती है। अगस्त-सितंबर के दौरान देश में जोरदार बारिश हुई और अब लौटते मानसून से भी कई राज्यों में जबरदस्त वर्षा हो रही है। इसमें पश्चिम बंगाल बिहार एवं महाराष्ट्र भी शामिल है। 

हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी 14 सितम्बर को ही शुरू हो गई थी लेकिन जब यह वापस लौट रहा था तब बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर के ऊपर बने कम दाब के क्षेत्र ने इसका रास्ता रोक दिया और इस ठहराव के कारण कई राज्यों में जोरदार बेमौसमी बारिश हो रही है।

इस असामयिक भारी वर्षा तथा इससे पूर्व हुई जोरदार बारिश के कारण धान, दलहन, तिलहन, कपास एवं गन्ना आदि फसलों को गंभीर क्षति हो रही है।

महाराष्ट्र, पंजाब एवं राजस्थान में क्षति का दायरा सबसे बड़ा बताया जा रहा है। अकेले महाराष्ट्र में करीब 68 लाख एकड़ क्षेत्र में खरीफ फसलों के बर्बाद होने की सूचना मिल रही है। समस्या अभी समाप्त नहीं हुई है क्योंकि कई राज्यों में भारी वर्षा का दौर जारी है।

देश के पूर्वी एवं पश्चिमी भाग में बारिश का सिलसिला बरकरार रहने से न केवल खरीफ फसलों की पैदावार उपज दर एवं क्वालिटी प्रभावित हो रही है बल्कि पकी हुई फसलों की कटाई-तैयारी में देर भी हो रही है जिससे नुकसान बढ़ने की आशंका है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान के प्रभाव का आंकलन किया जा रहा है

और इसके बाद उत्पादन अनुमान में बदलाव करने पर विचार हो सकता है। बाढ़-वर्षा से प्रभावित कई इलाकों में खरीफ फसलों की औसत उपज दर प्रभावित होने की आशंका है। 

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के खरीफ सीजन में खाद्यान्न (चावल, मोटे अनाज एवं दलहन) का उत्पादन बढ़कर 17.10 करोड़ टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है

जो 2024-25 सीजन के खरीफ उत्पादन 16.80 करोड़ टन से 3 लाख टन ज्यादा है। लेकिन आगे खाद्यान्न का उत्पादन अनुमान कुछ घटाया जा सकता है।

महाराष्ट्र में तो कुल बिजाई के आधे भाग में खरीफ फसलों के क्षतिग्रस्त या चौपट होने की सूचना मिल रही है। राज्य में इस बार करीब 1.45 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की खेती हुई है। कृषि मंत्री के मुताबिक इसमें से लगभग 68 लाख हेक्टेयर में फसलें बाढ़-वर्षा से प्रभावित हुई है।

सितम्बर तक के आंकड़े एकत्रित किए जा रहे हैं। इससे पूर्व अगस्त तक फसल को हुए नुकसान का आंकलन किया गया था और उसके आधार पर किसानों को 2215 करोड़ रुपए की राशि दी जा रही है। राज्य में सोयाबीन, मक्का, कपास, उड़द, मूंग, तुवर तथा गन्ना जैसे फसलों को काफी नुकसान हुआ है।