मानसून की वर्षा का तिलहन फसलों पर दोतरफा असर
22-Sep-2025 04:37 PM
मुंबई। भारतीय मौसम विज्ञानं विभाग (आईएफडी) ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में अगले दो सप्ताहों के दौरान देश के मध्यवर्ती एवं दक्षिणी राज्यों में सामान्य औसत से अधिक वर्षा होने का अनुमान व्यक्त किया था और कुछ क्षेत्रो में अत्यंत जोरदार बारिश होने की संभावना व्यक्त की थी। खरीफकालीन तिलहन फसलों पर इसका दोतरफा असर पड़ने की उम्मीद है आमतौर पर यह बारिश सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी एवं अरंडी जैसे खरीफकालीन तिलहन फसलों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है लेकिन इससे कहीं-कहीं चुनौतिया एवं समस्याएं भी उतपन्न होने की आशंका है जिन इलाको में जरूरत से बहुत ज्यादा या अधिशेष वर्षा होगी वहां खेतो में पानी भर सकता है। इससे तिलहन फसलों की क्वालिटी, उपजदर एवं कुल पैदावार के साथ-साथ कटाई तैयारी पर भी असर पड़ सकता है। फसलों की कटाई में देर होने से संकट और बढ़ सकता है। खाद्य तेल उद्योग की सम्पूर्ण परिदृश्य पर गहरी नजर रखनी होगी और समय के अनुरूप अपनी रणनीति में सुधार करना होगा।
सोयाबीन एवं तिल की वजह से इस बार तिलहन फसलों के कुल बिजाई क्षेत्र में कमी आई है जबकि गुजरात में बेहतर बिजाई के कारण मूंगफली एवं अरंडी का रकबा बढ़ गया है जहां तक सूरजमुखी का सवाल है तो अन्य तिलहन फसलों की तुलना में इसका उत्पादन क्षेत्र बहुत कम या नगण्य रहता है नाइजरसीड की हालत भी ऐसी है।
सितम्बर की बारिश आगामी रबी तिलहन फसलों और खासकर सरसो की बिजाई एवं प्रगति के लिए फायदेमंद साबित होगी और किसानो को इसकी अगैती बिजाई का प्रोत्साहन मिलेगा। चूंकि सरसो का थोक मंडी भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊंचा चल रहा है और इससे उत्पादकों को अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है जिससे किसान उत्साहित है इसलिए आगामी रबी सीजन के दौरान इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण तिलहन का क्षेत्रफल बढ़ने की उम्मीद है।
