मसाला निर्यात में प्रतिस्पर्धा

18-Apr-2026 10:45 AM

समग्र रूप से भारत दुनिया में मसालों का सबसे प्रमुख उत्पादक, उपभोक्ता एवं निर्यातक देश बना हुआ है। यहां से संसार  के 100 से ज्यादा देशों को 80 से अधिक किस्मों के साबुत मसालों तथा मूल्य संवर्धित मसाला उत्पादों का निर्यात किया जाता है।

अनेक मसालों के निर्यात में भारत अग्रणी स्थान पर कायम है लेकिन कुछ अलग-अलग मसालों के वैश्विक निर्यात बाजार में इसे दूसरे आपूर्तिकर्त्ता देशों की सख्त चुनौती एवं कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा विभिन्न आयातक देशों द्वारा कीटनाशी अवयवों की उपस्थिति के बारे में बनाए जा रहे सख्त नियमों के कारण भी मसालों का निर्यात प्रभावित होने की आशंका है। गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के लिए भारतीय मसाला उत्पादकों एवं निर्यातकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

नब्बे के दशक तक भारत संसार में कालीमिर्च का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश बना हुआ था मगर अब वियतनाम इससे काफी आगे निकल चुका है। काजू का मामला भी ऐसा ही है। इसी तरह जीरा के निर्यात बाजार में चीन की चुनौती बढ़ती जा रही है।

ध्यान देने की बात है कि चीन कुछ वर्ष पूर्व तक भारत से करीब 60-70 हजार टन जीरा का सालाना आयात करता था मगर अब वहां उत्पादन इतना बढ़ चुका है कि वह कुछ देशों को इसका निर्यात करने की स्थिति में पहुंच गया है। छोटी इलायची के मामले में भारत को ग्वाटेमाला की चुनौती झेलनी पड़ती है। लालमिर्च, हल्दी एवं धनिया के निर्यात बाजार में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। 

अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के दौरान भारत से जीरा का निर्यात 15 प्रतिशत घटकर 1.67 लाख टन रह गया। भारत में  जीरा की उत्पादकता दर 450-500 किलो प्रति हेक्टेयर है जबकि चीन में इससे डेढ़ गुणा ऊंची है। यद्यपि भारतीय मसालों के निर्यात का प्रदर्शन वर्तमान समय में संतोषजनक है मगर भविष्य के लिए सजग-सतर्क रहना अत्यन्त आवश्यक है।