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08-Oct-2026 08:14 PM
नेपाल। मध्य प्रदेश में इस वर्ष मानसूनी बारिश का वितरण असमान रहने से कुछ भागों में भारी वर्षा हुई जबकि कुछ अन्य हिस्सों में सामान्य औसत से कम पानी बरसा। वर्षा पर आश्रित क्षेत्रों में किसान इस बार फसलों के चयन में ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते हैं
और इसलिए गेहूं के बजाए दलहन-तिलहन फसलों की खेती को प्राथमिकता देने के मूड में हैं। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश चना तथा मसूर का सबसे प्रमुख तथा मटर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। वहां रबी फसलों की बिजाई जल्दी ही आरंभ होने वाली है।
राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के बाद सरसों का सर्वाधिक उत्पादन मध्य प्रदेश में ही होता है। इस बार राज्य में गेहूं के मुकाबले दलहन-तिलहन फसलों के बीज की मांग 25-30 प्रतिशत तक बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य में रबी सीजन के दौरान औसतन 20-25 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का वितरण किया जाता है सामान्य वर्षों में सकल वितरण में अकेले गेहूं के बीज की भागीदारी 65-70 प्रतिशत या 14-16 लाख क्विंटल तक रहती है लेकिन शुरुआती संकेतों को देखते हुए लगता है कि इस बार गेहूं के बीज की कुल मांग घटकर 11-12 लाख क्विंटल पर अटक सकती है। मध्य प्रदेश से मालवा संभाग (इंदौर-उज्जैन) मैक्रोनी एवं ड्यूरम गेहूं का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। लेकिन इस बार वहां गेहूं का रकबा घटने तथा चना-सरसों का क्षेत्रफल बढ़ने की संभावना है।