पॉल्ट्री उद्योग में सोया मील की मांग बढ़ने के संकेत
14-Jan-2026 02:51 PM
मुंबई। सोयामील के उत्पादकों / प्रोसेसर्स को स्वदेशी पॉल्ट्री उद्योग में इस महत्वपूर्ण कच्चे माल की मांग एवं खपत में कुछ सुधार दिखाई पड़ रहा है लेकिन डिस्टीबर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (डी डी जी एस) के बढ़ते उपयोग से उसकी चिंता भी बरकरार है। डी डी जी एस अपेक्षाकृत सस्ता होता है और पशु आहार तथा पॉल्ट्री फीड निर्माण में इसका इस्तेमाल लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है। अनाज से एथनॉल का निर्माण करने के क्रय में एक उप उत्पाद के रूप में डी डी जी एस का निर्माण होता है।
इंदौर स्थित संस्था -सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (सोपा) के अनुसार फीड सेक्टर में सोयामील का उठाव बढ़ रहा है और खासकर पॉल्ट्री उद्योग में इसकी मांग एवं खपत में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। लेकिन वहां डी डी जी एस की चुनौती भी बनी हुई है।
सोपा की रिपोर्ट के मुताबिक दिसम्बर में 5 लाख टन सोयामील का उठाव पॉल्ट्री क्षेत्र द्वारा किया गया जो नवम्बर के बराबर ही रहा। लेकिन 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन की पहली तिमाही में यानी अक्टूबर-दिसम्बर 2025 के दौरान पशुआहार / पॉल्ट्री फीड निर्माण उद्योग में सोयामील की कुल खपत घटकर 16 लाख टन पर अटक गई जो वर्ष 2024 की सामान अवधि की खपत 17 लाख टन से 1 लाख टन कम रही। इसी तरह खाद्य उद्देश्य के लिए भी सोया मील की मांग इसी अवधि में 2.10 लाख टन से फिसलकर 2.05 लाख टन रह गई।
सोपा के मुताबिक अक्टूबर-दिसम्बर 2025 के दौरान देश में कुल 23.67 लाख टन सोयामील का उत्पादन हुआ जो वर्ष 2024 की सामान अवधि के उत्पादन 24.07 लाख टन से कुछ कम था। इसी तरह समीक्षाधीन अवधि के दौरान मंडियों में सोयाबीन की आवक 46 लाख टन से घटकर 43 लाख टन तथा दूसरी कुल क्रशिंग 30.50 लाख टन से फिसलकर 30 लाख टन पर सिमट गई। दिसम्बर 2025 के अंत में उद्योग के पास 1.73 लाख टन सोयामील तथा समूचे देश में 66.53 लाख टन सोयाबीन का स्टॉक मौजूद रहने का अनुमान लगाया गया है। तिमाही आधार पर सोयामील का निर्यात 5.18 लाख टन से गिरकर 5.07 लाख टन रह गया।
